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आयुर्वेद छात्रों में भड़का गुस्सा

Pilibhit

Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। आयुर्वेदिक व यूनानी डॉक्टरों को एलोपैथिक पद्धति में प्रेक्टिस से रोकने के आदेश पर विरोध की चिंगारी भड़क गई। ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के छात्रों ने दो दिन में स्थिति स्पष्ट न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टरों के मार्डन मेडिसिन में प्रेक्टिस पर रोक के आदेश की खबर पर छात्र हॉस्टल से आयुर्वेदिक कालेज पहुंच गए। वहां छात्रों ने मौजूदा परिस्थितियों पर मंथन किया। डॉ. नफीस अहमद ने कहा कि बीएएमएस के स्लेबस में छह माह की एलोपैथिक मेडिसिन की इंर्टनशिप की व्यवस्था है। इंडोमेट्रियल बायोप्सी, पल्स पोलियो, सेटावाइरस, हाइपर पारेक्सिया, फोटोथेरैपी और विटामिंस जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। उन्होंने कहा कि यह सब एलोपैथी पद्धति में है। कहा कि जब एलोपैथी की प्रेक्टिस पर पाबंदी लगाई जा रही है तो सिलेबस में इसे क्यों पढ़ाया जा रहा है। डॉ. हेमंत ने कहा कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में 50 प्रतिशत एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है। कहा कि यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले स्टूडेंट जो पढ़ और देख रहे हैं वही सीखेंगे। कई राज्यों की सरकारों ने इस पर रोक नहीं लगाई है। फिर यूपी में ही रोक क्यों लगाई जा रही है। छात्रों का कहना है कि सरकार दो दिन में स्पष्ट करे कि बीएएमएस डॉक्टरों को एलोपैथिक पद्धति में प्रशिक्षण देने के बाद प्रेक्टिस से क्यों रोका जा रहा है। जबकि झोलाछाप खुले आम प्रेक्टिस कर रहे हैं, उन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। तय किया गया कि दो दिन में स्थिति स्पष्ट न होने पर आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. सचिन, डॉ. लोकेन्द्र, अरविंद वर्मा, पंकज, आरती सिसौदिया, स्वालेहा सिद्दीकी, अंकिता अग्रवाल, जूली माथुर, रजनी राठौर, कामिनी सिंह, ज्योति शुक्ला, अनिल गिरी, पियूष गुप्ता, राकेशस पांडे, अफरोज अहमद, अरविंद यादव, रोहित रत्न, शेष गुप्ता, रजनीकांत, अविनाश सिंह, आशुतोष पाठक, अंकुर पाराशर, रिमी सिंह व मोहम्मद जियाउल्ला समेत काफी लोग थे।
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यह तो कोई तुक ही नहीं
यह तो कोई तुक ही नहीं है कि एलोपैथिक पद्धति में पढ़ाई के बाद भी प्रेक्टिस पर रोक लगाई जा रही है। माडर्न मेडिसिन में प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र दिया जाता है। आयुर्वेदिक कालेजों में माडर्न मेडिसिन का प्रयोग होता है। फिर रोक का कारण क्या है।
अविनाश सिंह
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सीसीआईएम ने सिलेबस में की व्यवस्था
सीसीआईएम ने बीएएमएस के सिलेबस में माडर्न मेडिसिन पद्धति के शिक्षण की व्यवस्था दी है। जो विषय हमें पढ़ाए जा रहे हैं उस पर रोक लगाने का अर्थ समझ से परे है। अन्य राज्यों में ऐसी कोई रोक नहीं है। फिर यूपी में ऐसा क्यों किया जा रहा है।
अंकुर पाराशर
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छात्रों का भविष्य ध्यान में रखा जाए
छात्रों को एनॉटमी, टैक्सीकोलॉजी और सर्जरी जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं। यह सब एलोपैथिक पद्धति का हिस्सा हैं। प्रशिक्षण लेने के बाद प्रेक्टिस पर रोक लगाना तो नाइंसाफी है। सरकार को छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
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भविष्य को लेकर चिंतित हैं छात्र

ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप प्रेक्टिस कर रहे हैं। आयुर्वेदिक छात्र प्रशिक्षण लेने के बाद भी प्रेक्टिस नहीं कर सकते। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है। आयुर्वेदिक छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार और सीसीआईएम इस पर गौर करे।
मोहम्मद जियाउल्ला
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