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14 घंटे गुल रही एक तिहाई शहर की बिजली

Pilibhit

Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। कई कई घंटों के अंतराल पर हो रही बारिश से उमस बढ़ने पर बिजली कटौती मुसीबत बनी हुई है। बीती रात से शनिवार दोपहर तक शहर के एक तिहाई भाग की बिजली गुल रहने से लोग बिजली पानी को तरसते रहे। वजह यह कि रात 12 बजे हुए फाल्ट को सुबह तलाशा जा सका। आपूर्ति शुरू होते ही रोस्टिंग हो गई। वहीं शहर के अन्य हिस्सों में बिजली कटौती से भी लोग बेहाल रहे।
बिजली कटौती का शेड्यूल तय होने के बाद भी बिजली आने जाने का समय निर्धारित नहीं है। कभी दोपहर तीन बजे जाकर शाम सात बजे आती है तो कभी 12 बजे से शाम चार बजे तक गुल होती है। शनिवार को सुबह 10 बजे बिजली गुल हो गई। घरों में महिलाएं जरूरी काम से अभी निपट भी नहीं पाईं थीं कि बिजली गुल होने से पानी भी गायब हो गया। बाजार और दफ्तर खुलते ही बिजली नदारद होने से लोगों को उमस भरी गर्मी से पसीना पसीना होना पड़ा। दोपहर दो बजे बिजली आने पर लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद शाम तक कई बार होने वाली ट्रिपिंग ने भी खूब रुलाया।
इधर, रामलीला मैदान स्थित बिजली घर में लगे 10 एमबीए के ट्रांसफार्मर का फ्यूज उड़ने से रात में करीब 12 बजे टाउन वन फीडर की बिजली गुल हो गई। इससे उपाधि महाविद्यालय, मोहल्ला तुलाराम, नई बस्ती, स्टेशन रोड, गैस चौराहा, चावला चौराहा, मोहल्ला पूरनमल, इनायतगंज, गोपाल सिंह केसरी सिंह सहित कई मोहल्लों की बिजली गुल हो गई। विभाग के कर्मचारियों ने रात में फाल्ट तलाश करने की जहमत नहीं उठाई। सुबह फाल्ट की तलाश शुरू हुई। नौ बजे फाल्ट मिला तो सही करने में करीब पौन घंटा लग गया। इसके बाद जैसे ही ट्रांसफार्मर का फ्यूज बांधकर बिजली चालू की गई। तभी रोस्टरिंग हो गई। इस तरह शहर के एक तिहाई भाग के लोग करीब 14 घंटे तक बिजली पानी से महरूम रहे। इससे लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी रही।
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किसी भी पंप पर नहीं है जनरेटर व्यवस्था
पेयजलापूर्ति के लिए शहर के किसी भी पंप पर जनरेटर की व्यवस्था न होने के कारण जितनी देर बिजली नहीं आती उतनी देर पानी को भी तरसना पड़ता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बिजली रहते हुए फाल्ट के चलते कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति नहीं हो पाती। ऐसे इलाकाें में पानी की आपूर्ति से भी लोग महरूम रह जाते हैं।
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एसडीओ टाउन अनुराग कटियार का कहना है कि टाउन वन फीडर की बिजली एक लाइन पर फाल्ट आने के कारण ठप हुई थी। स्टाफ कम होने के कारण रात में फाल्ट नहीं तलाशा जा सका। सुबह फाल्ट सही हुआ तो रोस्टरिंग हो गई। इससे लोगों को अधिक असुविधा का सामना करना पड़ा।
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