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पुलिस ने शुरू की जांच पड़ताल

Pilibhit

Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
बिलसंडा। नगर से सटे गांव मझिगवां स्थित भगवान गौरीशंकर के प्राचीन मंदिर की संपत्ति के महंत श्री सिद्धेश्वर जी महाराज द्वारा दो वर्ष पूर्व बनवाए गए ट्रस्ट को लेकर विवाद गहराने लगा है। महंत के शिष्य स्वामी योगेश्वरानंद क ा कहना है कि ट्रस्ट में गुरूजी को गृहस्थों के बजाय संतों को शामिल करना चाहिए। उधर, गुरूजी ने थाने में शिष्य योगेश्वरानंद के खिलाफ तहरीर दी है, जिसमें उन पर हत्या कराने की आशंका जताते हुए सुरक्षा की गुहार की है। इसकी पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
शिष्य योगेश्वरानंद ने बुधवार को नगर एवं क्षेत्र के तमाम सम्भ्रांत लोगों को मंदिर में बुलाकर बैठक की जिसमें ट्रस्ट में शामिल सदस्यों को लेकर ही चर्चा हुई। लोगोें ने कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान नगर के स्वर्गीय सेठ टीकाराम वैश्य के नाम का पत्थर निकला था। सो ट्रस्ट में उनके परिवार के किसी सदस्य को शामिल करना चाहिए।
गुरू शिष्यों के बीच ट्रस्ट बना विवाद का कारण
इस मंदिर के नाम करीब 16 एकड़ उपजाऊ भूमि है। इसके महंत अनंत गिरी महाराज उर्फ लंबे बाबा ने वर्ष 1989 में वसीयत की थी, जिसमें सिद्धेश्वर जी महाराज को सर्वराकार बनाया। सिद्धेश्वर जी महाराज मंदिर में रहते हैं, जबकि योगेश्वरानंद बेबर स्थित आश्रम में। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन भी वर्ष 2010 में कराया जा चुका है।
वर्जन
1

योगेश्वरानंद बेवजह ट्रस्ट को लेकर बखेड़ा कर रहे हैं। उन्होंने नगर के हनुमान मंदिर को पहले से ही सौंप रखा है। इस मंदिर की संपत्ति खुर्द बुर्द न हो इस कारण ट्रस्ट बनाया है। जिससे वह असंतुष्ट हैं।
श्रीश्री 1008श्री सिद्धेश्वर जी महाराज महंत
2

संत ही हो ट्रस्ट के सदस्य
सिद्धेश्वर जी महाराज मेरे गुरू हैं। वह बूढ़े हो चुके हैं। गृहस्थ लोगों को ट्रस्ट में शामिल करने पर मैंने आपत्ति की है। ट्रस्ट में संत ही सदस्य होने चाहिए।
स्वामी योगेश्वरानंद जी महाराज पूर्व मंत्री जूना अखाड़ा बनारस
3
तो इस्तीफा देने को तैयार: सिद्धेश्वर
सिद्धेश्वर जी महाराज ने मंदिर की संपत्ति के रख रखाव के लिए ट्रस्ट बनाया है। जिसमें मेरे अलावा महेश सक्सेना एडवोकेट, सुधीर जिंदल, महेश गुप्ता, रामसिंह वर्मा, देवकी नंदन वर्मा और कई संत सदस्य हैं। अगर किसी को मेरे सदस्य रहने पर आपत्ति है तो वह इस्तीफा देने को तैयार हैं।
गौरीशंकर वर्मा ट्रस्टी सदस्य
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