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माननीयों को तोहफे से सभी हैरान

Pilibhit

Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST

पीलीभीत। यूपी विधानसभा में बजट सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने माननीयों को विधायक निधि से 20 लाख रुपये तक की गाड़ी खरीदने की अनुमति देकर पहला तोहफा दे दिया है। यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब आम आदमी दो जून की रोटी के लिए तरस रहा है। युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है और छात्रों के लिए शिक्षण संस्थानों की कमी है। इतना ही नहीं, विधायक निधि भी अब डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है। जबकि विधायक निधि के इस्तेमाल पर पहले ही सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार के फैसले पर लोगों को आश्चर्र्य है। अमर उजाला ने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों से इस बाबत उनके नजरिया जाना, तो नाराजगी साफ दिखाई दी।
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आर्थिक ढांचे पर कुठाराघात
प्रमुख व्यवसायी अशोक भसीन सरकार के फैसले पर हैराने जताते हुए कहते हैं यूपी के विधायकों की संपत्तियां पहले से ही अकूत हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है। जिसका प्रभाव स्वास्थ्य शिक्षा और खाद्यान्न व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में विधायक निधि से विधायकों को 20 लाख रुपये की गाड़ी खरीदने का ऐलान प्रदेश के आर्थिक ढांचे पर कुठाराघात होगा।
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विधायक निधि का दुरुपयोग है यह
उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पीके सिंह का कहना है कि विधायकों की आय की पहले से ही कोई सीमा नहीं है। अनेक बेनामी संपत्तियां बनाने के आरोपों में माननीय घिरे रहते हैं। विधायक निधि का इस्तेमाल क्षेत्र में विकास के लिए होने का प्रावधान है, उसका निजी इस्तेमाल का कोई औचित्य समझ में नहीं आता। सरकार के इस फैसले से गरीबों बेरोजगारों को कष्ट पहुंचेगा।
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समस्याओं से कोई सरोकार नहीं
व्यापारी नेता अफरोज जिलानी का कहना है कि समाज के आर्थिक ढ़ांचे को सुधारने के लिए विधायकों को पहले से मिल रही सुविधाओं को कम किए जाने की जरूरत थी। मुख्यमंत्री ने विधायकों को 20 लाख तक की गाड़ी खरीदने का ऐलान कर साफ कर दिया है कि उन्हें सूबे की अन्य ज्वलंत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। विधायक निधि का दुरुपयोग रुक नहीं रहा, अब और बढ़ेगा।
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धन की बर्बादी ही है
शारदा हॉस्पिटल के एमडी डॉ राजीव अग्रवाल का कहना है कि प्रदेश को आर्थिक संकट से उबारने के बजाए विधायकों को 20 लाख रुपए निजी इस्तेमाल की छूट देने के मुख्यमंत्री के फैसले का व्यापक विरोध होना चाहिए। एक तरफ दो वक्त की रोटी के लिए लोग आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाते हैं और दूसरी तरफ माननीयों को इतना बड़ा तोहफा देने का फैसला लिया जाता है।
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