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चेतन भगत, अगाथा क्रिस्टी स्विफ्ट पसंद हैं बच्चों को

Pilibhit

Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। गर्मी की छुट्टी में सैर-सपाटा, मौज-मस्ती तो होती ही है लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो कोर्स से हटकर किताबें भी पढ़ रहे हैं। जोनाथन स्विफ्ट, अगाथा क्रिस्टी, चेतन भगत और खुशवंत सिंह बच्चों के पसंदीदा लेखक हैं। कुछ बच्चे खाली समय में कॉमिक्स पढ़कर मनोरंजन कर रहे हैं। इस वर्ग में भी हिंदी कहानियों से दूरी मायूस करने वाली है।
लिटिल एंजिल्स स्कूल में कक्षा पांच के छात्र प्रियांशु गंगवार को कहानियों की किताबें बहुत पसंद हैं। टीवी पर कार्टून देखते हैं लेकिन बिजली चले जाने पर वह कभी चंपक (इंगलिश वर्जन) तो कभी जोनाथन स्विफ्ट की किताबें पढ़ने लगते हैं। बकौल प्रियांशु उन्हें जोनाथन स्विफ्ट की ‘ए टेल ऑफ ए स्विफ्ट’ बहुत अच्छी लगी। उन्हें अंग्रेजी में किताबें पढ़ना आसान लगता है। बेनहर पब्लिक स्कूल की छात्रा शहरीन खान मलिक को अगाथा क्रिस्टी की किताबें अच्छी लगती हैं। उनका कहना है कि उन्हें जासूसी वाली किताबें पढ़ने में बेहद मजा आता है। सेंट एलॉयसियस स्कूल के कक्षा आठ के छात्र मोहम्मद अफ्फान फारूक को चेतन भगत के उपन्यास पसंद हैं। इसके अलावा उन्हें कॉमिक्स पढ़ने में भी काफी आनंद आता है। ज्ञान प्रशांत मेमोरियल इंटर कॉलेज के कक्षा सात के छात्र अमन वाजपेयी को कॉमिक्स पढ़ने का शौक है। अमन बताते हैं कॉमिक्स में बड़ी दिलचस्प कहानियां होती हैं। कभी कभी कहानी समाप्त करने की ललक में मम्मी की डांट भी खाना पड़ती है।

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खुशवंत सिंह से प्रभावित हैं श्वेतांक
स्प्रिंगडेल कॉलेज के कक्षा 12 के छात्र श्वेतांक सक्सेना खुशवंत सिंह को बहुत दिलचस्पी से पढ़ते हैं। उन्हें खुशवंत सिंह की ‘ए पोट्रेट ऑफ ए लेडी’ बहुत अच्छी लगी। इसके अलावा श्वेतांक लुइस फिशर की किताबें भी शौक से पढ़ते हैं। फिशर द्वारा लिखी गई महात्मा गांधी की जीवनी ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। खुशवंत सिंह की कई बायोग्राफीज भी श्वेतांक को अच्छी लगीं।
इंटरनेट के युग में गुम हो रहीं किताबें
बुक सेलर निखिल अग्रवाल बताते हैं कि एक दशक पहले तक बच्चे छुट्टियों में बेशुमार किताबें पढ़ डालते थे। दुकान पर बच्चों की लाइन लगी रहती थी। पहले छुट्टियों से पहले उन्हें कई सीरीज की किताबें मंगाना पड़ती थीं। बच्चे एडवांस पैसे तक जमा करने को तैयार रहते थे। कंप्यूटर और इंटरनेट के युग में किताबों का क्रेज काफी कम हो गया है। इस युग में वेबसाइटों पर काफी साहित्य मिल जाता है।
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