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अशिक्षित, विकलांग और बेवा होने के बाद भी नहीं मानी हार

Pilibhit

Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
दुआएं खैर करते मां की जब शब भर गुजरती है,
खुदा से रूबरू होकर वह अपनी आंख भरती है।
हर इक तकलीफ सहकर पालती है अपने बच्चों को,
यह वह मां है जो बच्चों के लिए दिन रात मरती है।
एक शायर की यह पंक्तियां पीलीभीत की त्रिवेणी देवी के संघर्ष, त्याग और साहस को उद्घाटित करती हैं। वह 1999 में विधवा हो गईं। उन्होंने न सिर्फ अपने पांच बच्चों का पालन पोषण किया, बल्कि उन्हें मुकाम तक पहुंचाने में अपने को समर्पित कर दिया। विकलांग और अशिक्षित होने के बाद भी उन्होंने दो बेटियाें को शिक्षिका और एक को बैंक अधिकारी बनाने का लक्ष्य पूरा किया। ऐसी ममतामयी और त्यागमयी मां के हौसले को मदर्स डे पर सलाम।
शहर की राम हर्षण विहार कॉलोनी निवासी त्रिवेणी देवी पर 1999 में बुरा वक्त आया। 17 अगस्त 1999 को सहकारी गन्ना विकास समिति सितारगंज में गन्ना पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत उनके पति मंशाराम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उनके पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। बच्चों के पालन पोषण और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी त्रिवेणी देवी के कंधों पर आ गई थी। तब परिवार के आर्थिक हालात भी बेहतर न थे। बड़ी बेटी पूनम उस समय कक्षा 12 की छात्रा थी। इसके बाद पुत्र देवेंद्र, पुत्री प्रीति, प्रिया और पुत्र पंकज भी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। पंकज की उम्र तब आठ साल थी। त्रिवेणी देवी पति की मौत से करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर गवां चुकीं। रिश्ते -नातेदारों ने मशविरा दिया कि बच्चों की पढ़ाई रोक दें। बेटों को किसी काम पर लगा दें। त्रिवेणी देवी को यह गंवारा न हुआ। उनका सपना तो कुछ और ही था। खुद अशिक्षित होते हुए भी उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा और बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का संकल्प ले डाला। बेहद आर्थिक तंगी में इतना बड़ा लक्ष्य निर्धारित तो कर लिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि लक्ष्य पूरा कैसे होगा। त्रिवेणी देवी ने संघर्ष का रास्ता चुना और साहस की डोर को मजबूती से थाम बच्चों को मां की ममता के साथ पिता की कमी का अहसास नहीं होने दिया। चौथे नंबर की बेटी प्रिया तब बेनहर पब्लिक स्कूल में पढ़ रही थी। स्कूल के निदेशक परविंदर सिंह सैहमी ने एक दिन उनके घर पहुंच कर प्रिया को एडाप्ट करने का प्रस्ताव रख दिया। परिवार ने हां की तो प्रिया की जिंदगी अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगी। त्रिवेणी देवी ने जो थोड़ी बहुत जमीन और जेवर था सब बच्चों के भविष्य पर न्योछावर कर दिया। करीब चार साल तक बेहद खराब दौर से गुजरने के बाद बेटे देवेंद्र कुमार प्रभाती को मृतक आश्रित में नौकरी मिल गई। इसे हासिल करने के लिए भी त्रिवेणी देवी को बहुत मशक्कत करनी पड़ी।
आज इस परिवार के हालात बदल चुके हैं। बेटी पूनम और प्रीति ने रूहेलखंड विश्वविद्यालय से बीएड पूरा कर लिया है। उन्हें किसी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में तैनाती का इंतजार है। बेटी प्रिया ने आज ही बैंग्लोर में आईसीआईसीआई बैंक में बतौर असिस्टेंट मैनेजर कार्यभार ग्रहण किया है। पंकज एमकाम कर रहे हैं। उनका इरादा बैंकिंग या सिविल सेवा में जाने का है।
इंसेट.......
ईश्वर ने दिया सेवा का मौका
बेनहर पब्लिक स्कूल के निदेशक परविंदर सिंह सैहमी आज बेहद खुश हैं। बताते हैं कि प्रिया के असिस्टेंट बैंक मैनेजर के रूप में ज्वाइन करने पर उनकी प्रतिज्ञा पूरी हुई। वह इसे ईश्वर का आशीर्वाद मानते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कोई मदद नहीं की, बल्कि ईश्वर ने उन्हें सेवा का अवसर दिया।
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