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फुल पेमेंट के बिना भी मिल सकता है फ्लैट बेचने का हक

Noida

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
नोएडा। प्राधिकरण से निर्मित भवनों के आवंटियों को भी अब पूरे भुगतान के बिना भी बेचने का अधिकार मिल सकेगा। निबंधन विभाग के प्रस्ताव पर प्राधिकरण इन संपत्तियों के हस्तांतरण को राजी हो गया है। मंजूरी के लिए आगामी बोर्ड बैठक के एजेंडे में इसे भी शामिल किया गया है। इससे करीब चार हजार आवंटियों को अपनी संपत्ति बेचने का अधिकार मिल जाएगा। मंगलवार को डीआईजी स्टांप वीडी शर्मा, एआईजी एसके सिंह व प्राधिकरण के एसीईओ प्रमांशु की बैठक हुई। इसमें निबंधन विभाग ने प्रस्ताव रखा कि सेक्टर 99, 100, 105 व 135 सहित अन्य सेक्टरों में आवंटित एलआईजी, एचआईजी, एमआईजी व डुपलेक्स आदि का पूरा भुगतान किए बिना ट्रांसफर का अधिकार नहीं है। यहां तक कि श्रमिक कुंज व कांशीराम आवासीय योजना के आवंटियों को भी यह अधिकार नहीं है। ऐसे में अगर कोई आवंटी इससे पहले बेचना चाहता है तो वह लीगल तरीके से नहीं बेच पाता। इसके लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लेकर अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त करता है। इसकी वजह से प्राधिकरण को ट्रांसफर चार्ज नहीं मिल पाता और स्टांप का भी नुकसान होता है। डीआईजी ने बताया कि इस प्रस्ताव को एसीईओ ने अपने स्तर से मंजूर कर लिया है और इसे कानूनी तौर पर अमलीजामा पहनाने के लिए 29 नवंबर को प्रस्तावित प्राधिकरण की बोर्ड मीटिंग में रखा जाएगा।
डीआईजी ने बताया कि भूखंडों पर पहले से ही ट्रांसफर का अधिकार है। आवंटी 30 फीसदी भुगतान के बाद बेच सकता है, मगर भवनों के मामले में यह लागू नहीं है। अब अगर यह प्रावधान लागू हो गया तो प्राधिकरण से निर्मित भवनों के हजारों आवंटियों को राहत मिल जाएगी। उनका कहना है कि अगर प्राधिकरण ने ट्रांसफर का अधिकार दे दिया तो तय तिथि के अनुसार जितना भुगतान बनता है, उतना जमा कर आवंटी भवन को बेच सकेगा। गौरतलब है कि इससे पहले निबंधन विभाग ने इस मुद्दे को मुख्य सचिव की हाल ही में हुई बैठक में भी रखा था। उसमें भी एसीईओ शामिल थे।
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आईटी आवंटियों की सूची जल्द होगी प्राधिकरण के पास
नोएडा। छूट लेने के बाद तय शर्तों का पालन न करने वाले आईटी आवंटियों की सूची निबंधन विभाग जल्द ही प्राधिकरण को सौंपेगा। मंगलवार को इनकी सूची तैयार न हो पाने के कारण इसे नहीं सौंपा जा सका। डीआईजी स्टांप वीडी शर्मा ने बताया कि नोटिस के बावजूद जिन आवंटियों ने स्टांप शुल्क जमा नहीं किया है और न ही नोटिस का जवाब दिया है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्राधिकरण को जल्द सूची सौंप दी जाएगी।
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