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गुपचुप तरीके से टोल वृद्धि पर उठने लगे सवाल

Noida

Updated Sat, 10 Nov 2012 12:00 PM IST
नोएडा। डीएनडी पर चार साल तक प्राधिकरण ने टोल के दाम बढ़ने नहीं दिए, लेकिन अचानक गुपचुप तरीके से टोल वृद्धि पर सवाल उठने लगे हैं। प्राधिकरण की ओर से समझौते को आधार बनाकर अनुमति देने की बात कही जा रही है, जबकि कंपनी का कहना है कि रखरखाव में काफी खर्च हो रहा है इस वजह से टोल में वृद्धि की जा रही है।
वर्घ 2007 से 2011 के बीच नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ ने कई बार टोल वृद्धि के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था। टोल वृद्धि पर टोल कंपनी की नहीं चलने दी गई। समझौते के अनुसार टोल कंपनी के निदेशक मंडल में सीईओ नोएडा भी सदस्य हैं और उनकी अनुमति के बिना टोल शुल्क नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में नई सैद्धांतिक मंजूरी कब दी गई इसका खुलासा भी नहीं हुआ है। कंपनी टोल पर जाम की स्थिति को नियंत्रण करने के लिए दो रुपये और एक रुपये के खुले की व्यवस्था नहीं होने से बढ़ोतरी करना जरूरी बता रही है।
दूसरी ओर होटल आवंटन मामले में सीईओ व चेयरमैन को हटाने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस मंजूरी को लेकर सामाजिक व राजनैतिक संगठन मुखर होने लगे हैं। इससे पहले तीन बार से टोल बढ़ाने के बाद फोनरवा, आरडब्ल्यूए और राजनैतिक पार्टियां विरोध प्रदर्शन करती हैं। बीजेपी नेता कई बार मामले को विधानसभा में उठाने की बात कह चुके हैं, लेकिन हुआ कुछ नहीं।


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कब-कब गिरा प्रस्ताव
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-मई 2007
-अक्तूबर 2007
-अप्रैल 2008
-दिसंबर 2008
-मार्च 2009
-सितंबर 2009
-अप्रैल 2010
-नवंबर 2010
-मई 2011
-जुलाई 2011
-सितंबर 2012
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कब हुआ मंजूर
22 अक्तूबर 2011 को प्रस्ताव लाया गया और शुल्क बढ़ाने की अनुमति मिली। एक नवंबर 2011 को बीस फीसदी तक वृद्धि लागू की गई। तत्कालीन सीसीईओ बलविंदर कुमार ने टोल ब्रिज कंपनी की निदेशक मंडल की बैठक में प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। साथ ही खुले पैसों की व्यवस्था करके सुचारु रूप से संचालन का निर्देश जारी किया था।
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क्या है अनुबंध
नोएडा और टोल ब्रिज कंपनी के बीच डीएनडी पुल के लिए समझौता हुआ। यह देश का पहला प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित प्रोजेक्ट रहा। सात फरवरी 2001 को यह शुरू किया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने आश्रम की ओर से इसका उद्घाटन किया। समझौते के अनुसार दस साल तक नोएडा यमुना पर दूसरा पुल नहीं बना सकता। वहीं, लागत को वसूल करने के लिए 30 साल का अनुबंध किया गया है। साथ ही हर साल टोल शुल्क वृद्धि की अनुमति दी गई, जबकि घाटे को पूरा करने के लिए नोएडा को जिम्मेदारी मिली। सात फरवरी 2011 को डीएनडी दस साल पूरे कर चुका है। इसके बाद नोएडा ने यमुना पर नए पुल बनाने की योजना शुरू कर दी है।
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टोल कंपनी पर कसा गया था शिकंजा
टोल ब्रिज पर दाम बढ़ाने को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के बाद डीएनडी को वापस लेने की कवायद प्राधिकरण कर चुका है। तत्कालीन सीईओ मोहिंदर सिंह ने इतना विरोध किया कि टोल ब्रिज कंपनी ने प्राधिकरण को चिट्ठी लिखते हुए समझौते को समाप्त करने की बात तक कह डाली। इसके बाद पत्राचार हुआ और कंपनी ने कमर्शियल जमीन की मांग उठाई। इसी बीच टोल शुल्क बढ़ा दिए गए। अप्रैल 2010 में हुई कार्रवाई के जवाब में प्राधिकरण ने टोल ब्रिज कंपनी के प्रशासनिक भवन को अवैध करार देते हुए सील करने का काम शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद आनन-फानन टोल शुल्क को वापस लेना पड़ा।
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प्रतिक्रिया :-
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बढ़ी महंगाई के बीच झटका
महंगाई के बीच एक और झटका लगा है। रोजाना डीएनडी से दक्षिणी दिल्ली होते हुए गुड़गांव तक जाते हैं। ऐसे में छह रुपये प्रतिदिन के अनुसार 180 रुपये मासिक खर्च बढ़ेगा।
जोगिंदर।

लोगों की बढ़ेगी समस्या
दीपावली से ठीक पहले यह वृद्धि कंपनी को लाभ देगी, लेकिन आम वाहन चालकों की समस्या बढ़ाएगी। त्योहारों के मौके पर लाजपत नगर और सरोजनी नगर जाने वालों की संख्या बढ़ जाती है।
शिवकुमार

हर साल का विवाद समाप्त हो
साल दर साल होने वाले इस विवाद को एक बार में समाप्त कर देना चाहिए। सरकार एक बार बैठकर निर्णय कर लें, जिससे हर बार की समस्या समाप्त हो सकें।
प्रिंस

दिल्ली जैसी हो यमुना पार करने की सुविधा
दिल्ली ने यमुना पर जितने पुल बनाए हैं उसमें मुफ्त में सेवा मिलती है, जबकि नोएडा से दिल्ली जाने वाले डीएनडी पर पैसा देना पड़ता है। यह गलत है। इस पर जल्द फैसला होना चाहिए।
भूपेश
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