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कालिंदीकुंज मेट्रो परियोजना पर वन विभाग का भी पेंच

Noida

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
नोएडा। सेक्टर-37 से प्रस्तावित कालिंदीकुंज मेट्रो रूट पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर न होने के कारण काम तो अटका है ही, एक और अड़चन इसकी राह रोक सकती है। वह है पर्यावरण की क्लीयरेंस। इस रूट के डीपीआर को प्राधिकरण बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है।
वन विभाग के मुताबिक ओखला बर्ड सेंचुरी से दस किलोमीटर के एरिया में निर्माण करने पर पर्यावरण की क्लीयरेंस लेनी होती है। इसके लिए वन विभाग में आवेदन करना पड़ेगा। वहां से स्टेट बोर्ड और सेंट्रल बोर्ड से होकर पर्यावरण मंत्रालय जाएगा। मंत्रालय पक्षी विहार के पर्यावरण का असिस्मेंट करवाकर फिर एनओसी देेगा। इस काम में लगभग छह माह का वक्त लग जाता है। कई बार तो इससे भी ज्यादा वक्त गुजर जाता है। इस कारण डीपीआर के साथ पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन करना होता है, ताकि एमओयू साइन होने के साथ ही निर्माण कार्य शुरू हो सके। ओखला पक्षी विहार से बेहद करीब होने के कारण कालिंदीकुंज की प्रस्तावित लाइन पर पेंच फंस सकता है।
वन विभाग का कहना है कि ओखला बर्ड सेंचुरी से करीब होने के कारण इस रूट के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस काफी मुश्किल काम है। हालांकि पब्लिक की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार किया जाएगा। मगर इसके लिए पर्यावरण असिस्मेंट कराना होगा। वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर निर्माण कार्य शुरू करने तक एनओसी न ली गई तो विभाग काम रुकवाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को लिख सकता है। मालूम हो कि बॉटेनिकल गार्डन से कालिंदीकुंज तक मेट्रो विस्तार का काम 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य प्रस्तावित है। इस पर करीब पौने नौ सौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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मेट्रो के लिए भी क्लीयरेंस जरूरी
2009 में केंद्र से जारी अधिसूचना के मुताबिक ओखला पक्षी विहार के दस किलोमीटर के रेंज में होने पर सभी को पर्यावरण क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है। इससे किसी को भी छूट नहीं है। मेट्रो को भी नहीं। आरटीआई के जवाब में पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात को क्लीयर कर चुका है। ऐसे में मेट्रो से जुड़े विभाग को काम शुरू करने से पहले एनओसी लेनी होगी। ऐसा न करने पर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
बी प्रभाकर
वनाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर।
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दिल्ली सरकार दिलाएगी एनओसी
पर्यावरण सहित अन्य सभी तरह की एनओसी नोएडा प्राधिकरण और दिल्ली सरकार लेकर देगी। इससे डीएमआरसी क ा लेना देना होगा। अभी डीपीआर को प्राधिकरण बोर्ड ने ही मंजूरी दी है। दोनों सरकारों के बीच एमओयू साइन होना बाकी है। तब तक जो भी औपचारिकताएं हैं, दोनों सरकारें मिलकर पूरा कर लेंगी।
संध्या शर्मा
पीआरओ, डीएमआरसी
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