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‘झ’ से झाड़ू, ‘ट’ से टाट-पट्टी

Noida

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को देशभर के सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त और सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं छह माह के भीतर मुहैया कराने का निर्देश दिया है। हालात की जानकारी के लिए बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ ने नोएडा के सरकारी स्कूलों का जायजा लिया। कहीं स्कूलों में बच्चे झाड़ू लगाते दिखे तो कहीं गंदगी में ही टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे थे। कोई भी ऐसा स्कूल नहीं मिला, जहां सभी कक्षाओं में शिक्षक मौजूद हों। खाली पड़ी कक्षाओं में या तो बच्चे खुद पढ़ते नजर आए या मस्ती करते। इस दौरान बच्चों ने अपनी समस्याएं भी गिनाईं। पेश है एक रिपोर्ट
कक्षाओं में बच्चे ज्यादा तो खड़े होकर पढ़ाई
- गांधी स्मारक जूनियर हाई स्कूल, सेक्टर-22
समय-सुबह 10.30 बजे
विद्यार्थी-1000
शिक्षक-25
मौजूद-17
(छुट्टी पर-एक और सात बीएलओ ड्यूटी पर)
प्रधानाचार्य को साथ लेकर स्कूल का निरीक्षण किया तो ज्यादातर कक्षाएं विद्यार्थियों से खचाखच भरी थीं। कई कक्षाओं में सीटों से दुगनी संख्या होने के कारण काफी बच्चे खड़े होकर पढ़ रहे थे। यहां टाट-पट्टी पर बैठकर भी बच्चे पढ़ते नजर आए। स्कूल में एकमात्र हैंडपंप खराब पड़ा था। हालांकि स्कूल में साफ-सफाई थी।

बोले विद्यार्थी
जमीन में टाट-पट्टी पर बैठना पड़ता है। कई घंटे नीचे बैठने से पैरों में दर्द होने लगता है। मेज-कुर्सी नहीं उपलब्ध कराई जाती।
शिवम

मिड डे मील अच्छा नहीं है। कई बार हफ्ते में चार दिन नमकीन दलिया मिलता है।
विक्की, छात्र

बाथरूम में कई बार पानी नहीं आता। इसके अलावा दरवाजा भी टूटा हुआ है। दरवाजे की मरम्मत नहीं कराई जाती।
राशि
कक्षाओं में छात्राओं की संख्या अधिक है और मेज-कुर्सी कम। कभी-कभी दो कक्षाओं की छात्राओं को एक ही कमरे में बैठाया जाता है। ऐसे में कई छात्राओं को खड़े भी रहना पड़ता है।
प्रिया

आठवीं तक का यह स्कूल सरकारी सहायता व मान्यता प्राप्त है। कक्षा नौ और दस वित्तविहीन हैं। स्कूल की सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। 11वीं और 12वीं कक्षा शुरू करने की भी तैयारी है। इसके लिए कक्षाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
रमेश कुमार भारद्वाज
प्रधानाचार्य

बिजली न होने पर बेहाल दिखे बच्चे
आदर्श प्रथामिक विद्यालय, सेक्टर-12
समय-11.35 बजे
विद्यार्थी 700
शिक्षक 11
मौजूद 3
(सात टीचर बीएलए ड्यूटी पर और एक छुट्टी पर)
यहां प्राइमरी के सभी बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे थे। बिजली नहीं आने के चलते बच्चे गर्मी से परेशान थे। साफ-सफाई ज्यादा नहीं थी और दीवारों की हालत भी खराब दिखी। बच्चों ने बताया कि बिजली रहती कम है और जाती ज्यादा है।

बोले छात्र
कक्षा में टाट-पट्टी पर बैठाया जाता है। ऐसे में पैर दुखने लगते हैं।
- सरफराज
पंखे सिर्फ नाम के लिए हैं। एक खराब है जबकि बाकी इतने धीमे चलते हैं कि हवा नहीं लगती। गर्मियों में हाल बेहाल हो जाता है।
- आकाश

शिक्षिका एक, संभाले थी दो कक्षाएं
प्राइमरी स्कूल, निठारी
समय-दोपहर 12.15
जूनियर हाई स्कूल, निठारी
विद्यार्थी-350
शिक्षक-8
मौजूद-4

यहां कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही जो नजारा दिखा, चौंकाने वाला था। एक शिक्षिका दो कक्षाओं को संभाल रही थी। दोनों कक्षाओं के बीच में शिक्षिका कुर्सी पर बैठी हुई थी। अन्य दो कक्षाओं में शिक्षक नहीं थे और बच्चे शोर मचा रहे थे। थोड़ा आगे बढ़े तो देखा कि हादसे को दावत देता बिजली का पैनल बॉक्स खुला पड़ा था। कूड़े के ढेर भी कहीं-कहीं लगे हुए थे। कुछ आगे चले तो एक छात्रा कक्षा के बाहर झाड़ू लगाती दिखी। पूछने पर उसने कहा कि यह रोज का काम है। यहां सुबह आकर विद्यार्थियों को ही झाड़ू लगानी पड़ती है।

बोले छात्र
स्कूल परिसर में काफी गंदगी रहती है। बारिश में पानी भर जाता है जो कई बार कक्षाओं में भी घुस आता है और छत टपकती है।
नीरज

मिड डे मील अच्छा नहीं मिलता। कुछ दिन पहले मिड डे मील में कॉकरोच निकला था। पीने का पानी भी साफ नहीं है। कक्षा में छात्रों से झाड़ू लगवाई जाती है।
उषा


ड्रेस पाकर बच्चे खुश
प्राथमिक विद्यालय अगाहपुर
समय-दोपहर एक बजे
विद्यार्थी-251
शिक्षक-5
मौजूद-4
यहां बच्चों को ड्रेस बांटी जा रही थी। इसकी खुशी उनमें देखते ही बन रही थी। यहां की इंचार्ज अध्यापिका ने स्कूल का निरीक्षण कराया। यहां भी बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते नजर आए। सभी बच्चों की शिकायत थी कि स्कूल में सफाई नहीं रहती और पीने का पानी नहीं मिलता।

बोले छात्र
घर से पानी साथ लाना पड़ता है। बच्चों से ही झाड़ू लगवाई जाती है।
प्रवीन

स्कूल में सफाई कर्मचारी नहीं है। एक नौकर रखा है, जो शिक्षकों को पानी पिलाने से लेकर साफ-सफाई तक का जिम्मा संभालता है। पानी के लिए सरकारी बैंक ने आरओ स्कूल को भेंट किया है। इसे जल्द ही लगवा दिया जाएगा।
- बॉबी चौहान, इंचार्ज अध्यापिका

कक्षाएं तीन, शिक्षक दो
जूनियर स्कूल, अगाहपुर
विद्यार्थी-72
शिक्षक-3
मौजूद-2
तीन कक्षाओं का जिम्मा यहां दो शिक्षकों पर था। सारे विषय भी यही पढ़ा रहे थे। बच्चों ने पानी और शिक्षकों ने स्टाफ की कमी बताई।
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