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गन्ना भुगतान के लिए भटकते रहे किसान

Muzaffar nagar

Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
शामली। जिला बनने के साथ आस जगी थी कि गन्ना, कृषि, सिंचाई और नलकूप विभाग जिले में ही खुल जाएंगे। उन्हें अपनी समस्याओं के हल कराने के लिए मुजफ्फरनगर का अब चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। हालांकि सालभर में किसानों से जुड़ा एक भी विभाग यहां नहीं खुला। कृषि और गन्ना बाहुल्य जिले के किसान भी पूरे साल बकाया भुगतान के लिए भटकते रहे।
जून के महीने में कम बारिश होने पर किसान परेशान रहे। नहरों में पानी नहीं होने के कारण भी किसानों को कई समस्याओं से एक साथ जूझना पड़ा। नलकूप बोरिंग के लिए सरकारी अनुदान के लिए भी मुजफ्फरनगर में ही नलकूप विभाग के चक्कर काटने पड़े। 14 घंटे गांवों को बिजली देने की बजाय केवल 3-4 घंटे ही बिजली ही ग्रामीणों को नसीब हुई। दबाव बढ़ा तो सरकार ने जिले में अधीक्षण अभियंता की तैनाती तो कर दी, लेकिन स्टाफ और सुविधाओं की कमी है। अभी तक यहां जिला कृषि अधिकारी, उद्यान, जिला गन्नाधिकारी, नलकूप ,सिंचाई विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई।

जंग के अखाड़े बने शिक्षा मंदिर
शामली। जिले के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। हालांकि जिले में शिक्षा विभाग का हाल ही बेहाल है। शिक्षा के मंदिर जंग के अखाड़े बने रहे। इन पर निगरानी वाले महकमे ही जिले में नहीं हैं।
जिले में स्कूल कालेजों की कमी नहीं है। प्राइमरी से लेकर हायर एजूकेशन तक की सुविधा यहां हैं। हालांकि कई कालेजों में पढ़ाई कम और गुटबाजी ज्यादा रही। एक नामी कालेज के छात्रों ने बीसीए में प्रवेश लेने के बावजूद परीक्षा न होने पर खूब हंगामा किया था।
एक कालेज के सामने छात्र गुटाें में संघर्ष हुआ और फायरिंग से भी शहर दहला। सिक्का कालेज के छात्र गुटाें में भी खूब बवाल हुआ था। हालांकि कालेजों पर निगरानी करने वाला जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ही जिले में नहीं है। मुजफ्फरनगर से ही सब कुछ चल रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की तैनाती जरूर हो गई है। हालांकि अधिकारियों के बैठने के लिए जगह नहीं है। बीएसए एक प्राइमरी स्कूल के कमरे में दफ्तर चला रहे हैं।

सुंदरीकरण का सपना भी टूटा
शामली। जिला बनने के बाद शहर के सुंदरीकरण को लेकर लोगों की उम्मीदें अभी भी अधूरी है। जाम की समस्या भी जस की तस है। शहरवासियों को उम्मीद थी कि यहां पर सरकारी बजट से शहर का विकास होगा। हैरानी की बात यह है कि शहर में बच्चों के खेलने के लिए सरकारी स्तर पर कोई मैदान तक नहीं है। शहर के सहारनपुर रोड, धीमानपुरा फाटक पर जाम की स्थिति बेकाबू रहती है। पेजयल समस्या और बरसात में जलभराव की समस्याएं भी मुंह बाएं खड़ी हैं।
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