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दिलोें में हमेशा जिंदा रहेंगे रज्मी साहब

Muzaffar nagar

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
शामली। मशहूर शायर रज्मी साहब के इंतकाल के बाद उनके साथियों को बृहस्पतिवार का दिन बड़ा ही नागवार गुजरा। रज्मी को यादकर उनकी आंखों में आंसू भर आए। साहित्य से जुडे़ कवि, शायर और उनके मिलने वालों के पास अब सिर्फ उनकी यादें हैं। उनके प्रशंसकों ने कहा कि भले ही रज्मी साहब नहीं रहे, लेकिन वह हमेशा लोगों के दिलोें में जिंदा रहेंगे।
रज्मी साहब के बेहद नजदीकी रहे गयास मोहम्मद खान ने बताया कि शायद ही कोई दिन जाता हो, जब उनकी उनसे मुलाकात न होती रही हो। वह बीमार होते तो वह रोज उनके मिलने घर जाते। शेर- ओ शायरी के वह इस कदर दीवाने थे कि बीमारी की हालत में भी शेर गुनगुनाते रहते। यदि किसी वजह से दो तीन दिन उनसे मुलाकात नहीं होती थी तो वह नाराज हो जाते थे। रज्मी के इंतकाल के बाद बृहस्पतिवार का दिन उन्हें बेहद नागवार गुजरा। ऐसा लगा कि वह रोटी को नहीं, बल्कि रोटी उन्हें खा रही है। मेहमान नवाजी में उनका कोई जवाब नहीं था।
हरकेष राय मंगल ने बताया कि वह उनके शार्गिद हैं। रजमी साहब कुछ जगह अपने साथ मुशायरे में उन्हें ले गए। उनके प्यार और हौसले का ही असर है कि आज वह किसी लायक हैं।
शामली के कवि प्रदीप मायूस ने बताया कि कविता और शेर-ओ शायरी के प्रति हूुनर रखने वालों को वह दूर से पहचान लेते थे। उन्हें वह अपने पास बुलाकर उनके शेर दुरुस्त कराते और जानकारी भी देते थे। प्रदीप मायूस ने बताया कि साहित्य जगत को होने वाली यह क्षति शायद ही पूरी हो सके। मायूस ने अपने इस शेर से उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की-
ले गई खुशबू उड़ाकर आंधियां।
नादां गुच्छा खिलखिलाकर रह गया।

दौड़ में भी जवाब नहीं था
शामली। रज्मी साहब केवल शेर-ओ शायरी के शौकीन नहीं थे, बल्कि दौड़ में भी वह लाजवाब थे। उनके परिजनों ने बताया कि जब वह शामली के किसान इंटर कालेज में पढ़ते थे, तो वहां होने वाली दौड़ प्रतियोगिता में भी भाग लेते और हमेशा स्थान पाते थे।

उनकी दरियादिली का जवाब नहीं था
शामली। रज्मी साहब की दरियादिली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मुशायरों में कभी भी फीस की मांग नहीं की, जो भी मिला उसे ही स्वीकारा। कवि विनोद अश्क ने बताया कि उन्होंने अपने मुंह से कभी शुल्क नहीं मांगा। रज्मी साहब कहा करते थे कि वह तो साहित्य की सेवा कर रहे हैं। उसकी की ललक उन्हें है।

सांत्वना देने वालों का लगा रहा तांता
कैराना। शायर मुजफ्फर रज्मी के इंतकाल के बाद उनके बेगमपुर स्थित आवास पर परिजनों को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पालिका चेयरमैन और उनके प्रतिनिधियों के अलावा कस्बे और आसपास के कवि और शायरों ने पहुंचकर परिजनों को दिलासा दी। सबका कहना था कि रज्मी साहब ने न केवल कैराना, बल्कि पूरे हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है।
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