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दुराचार समाज के लिए कलंक

Moradabad

Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST

मुरादाबाद। दिल्ली कांड पर बुधवार को भी शहर की सड़कों में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। महिलाओं और बच्चों ने कैंडिल मार्च निकाला और महिलाओं से दुराचार/ अत्याचार को सभ्य समाज के लिए कलंक बताया।
महिला मंडल, आल इंडिया वूमैंस कांफ्रेंस एवं गायत्री परिवार रचनात्मक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में कैंडिल मार्च का आयोजन किया गया। कपूर कंपनी पुल से शाम के समय निकला कैंडिल मार्च प्रकाश नगर चौराहे तक पहुंचा। इससे पहले एक सभा हुई जिसमें सामूहिक दुराचार की निंदा करते हुए कहा गया कि मौजूदा कानूनों को और सख्त बनाने की जरूरत है। महिला अत्याचार के मामलों में अदालती कार्रवाई जल्द पूरी करने की मांग की गई। शर्म करो शर्म करो, मां बहनों पर रहम करो एवं वी वांट जस्टिस की आवाज बुलंद करते हुए यह कैंडिल मार्च निकला। महिलाओं के साथ युवतियां, बच्चे एवं पुरुष भी इसमें शामिल हुए। सभी काली पट्टी बांधे हुए थे। प्रमुख रूप से प्रेमलता सक्सेना, रीता सिंह, संतोष सैनी, डा. प्रेमवती उपाध्याय, मधु शर्मा, बाबूराम, मंगलसेन, जेएम सुयाल, सोमेश, प्रतीक, दिनेश शर्मा, नरेंद्र सिंह चौहान, भावना सक्सेना, सुधा त्रिपाठी, रंजना मेहरोत्रा, रचना अग्रवाल, निहारिका, बीना शर्मा, मनोरमा गुप्ता आदि प्रमुख रूप से मौजूद रही। पीड़ित छात्रा के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई।

मौजूदा कानून की हो समीक्षा
भारतीय मानवाधिकार मिशन की बैठक में दुराचार के मौजूदा कानून की पुनर्समीक्षा की आवाज उठाई गई। गांधीनगर में आयोजित बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष नबी जान सैफी ने कहा कि दिल्ली में छात्रा के साथ सामूहिक दुराचार की घटना जघन्य अपराध है। जिंदगी और मौत के बीच झूलती छात्रा के लिए पूरा देश दुआएं मांग रहा है। मानवता के चेहरे पर कालिख पोतने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। मंडल अध्यक्ष एचआर सनी ने कहा कि दुराचार संबंधी कानून की फिर से समीक्षा कर बदलाव किया जाना चाहिए। ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा देने की आवाज उठी। प्रमुख रूप से रेहाना रहमान, मो. ताहिर, मो. यूसुफ, मास्टर इरफान, चंद्रप्रकाश गुप्ता, मो. बिलाल, हाजी जावेद, दानिश मुर्तुजा, राहत अली, शहजादा परवेज, फहीम सैफी, शिवप्रकाश, मित्रपाल, राजेश, अमर सिंह, शावेज जान आदि मौजूद रहे।

मोबाइल पर दौड़ रही दिल्ली की दरिंदगी
दिल्ली कांड मोबाइल पर मैसेज अभियान के रूप में दौड़ रहा है। छात्रों की ओर से भेजे जा रहे मैसेज में हैवानियत की हदों को पार करने वाली घटनाओं पर अफसोस जाहिर करते हुए रोक के लिए कड़े कानून और पीड़िता को सामाजिक सम्मान की मांग की गई है।
टीएमयू के स्टूडेंट अनित राय, रिचा वर्मा एवं अमरेश यादव की ओर से भेजे जा रहे मोबाइल संदेश इस तरह हैं- ‘इस समय देश की राजधानी दिल्ली गैंगरेप के विरोध में पिछले कई दिनों से परेशान हो रही है। इसके हिंसक हो जाने के कारण एक पुलिस कर्मी की मौत भी हो चुकी है। इस घटना से प्रश्न उठता है कि जब देश की राष्ट्रीय राजधानी में चलती बस में इस तरह की घटना हो सकती है तो देश के बाकी हिस्सों में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं? कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब समाचार पत्रों में चीर कहानी एवं बलात्कार की कोई खबर न हो। इस तरह की घटनाओं में पुलिस कम ही मामलों में रिपोर्ट दर्ज करती है। ज्यादातर पीड़िता अपनी बेइज्जती की वजह से किसी को नहीं बताती। जो पीड़िता है उसे समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता, जबकि होना उल्टा चाहिए। इसमें रोक के लिए कड़े कानून का प्राविधान करना होगा, और पुलिस प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

न्यायमूर्ति वर्मा समिति ने मांगे सुझाव
महिलाओं की सुरक्षा तथा गरिमा रक्षा के लिए वर्तमान कानून में मुमकिन संशोधन के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित न्यायमूर्ति वर्मा समिति ने 5 जनवरी 2013 तक सर्वसाधारणों, कानूनी पेशेवरों, एनजीओ, महिला समूह और सिविल सोसायटी से सुझाव, जानकारी अनुभव साझा करने की अपील की है। इसके साथ ही देश भर के प्रख्यात विधिवेत्ता, कानूनी विशेषज्ञों, न्यायविदों, महिला समूहों, सिविल सोसायटी सदस्यों से प्रतिक्रिया मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति में हिमाचल उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्रीमती लीला सेठ एवं भारत के पूर्व सालिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम शामिल हैं। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। समिति की वेबसाइट- जस्टिसडॉटवर्मा एटदरेटऑफ निकडॉटइन अथवा फोन नंबर 011- 23092675 पर फैक्स के जरिए 5 जनवरी तक कानून में संशोधन से संबंधित सुझाव भेजे जा सकते हैं।
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