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अटैचमेंट के खेल पर रोक लगाने में नाकाम

Moradabad

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
मुरादाबाद। बोर्ड परीक्षा में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले विद्यालयों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। पांचवीं तक की मान्यता लेकर दसवीं और बारहवीं की कक्षाएं चलाने वालों को लेकर शासन स्तर से कड़ाई की जा रही है। दसवीं और इंटरमीडिएट के लिए अपने यहां रजिस्ट्रेशन कराकर दूसरे विद्यालयों से परीक्षा फार्म भरवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जबकि कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जिन पर कार्रवाई की तलवार लटक चुकी है। लेकिन इन विद्यालयों के नाम दबाने की कोशिश की जा रही है। परीक्षा फार्म भरने का कार्य पूरा होने के कारण जांच होने की स्थिति में हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा।
अटैचमेंट के खेल के माध्यम से मोटी कमाई करने वाले विद्यालयों की शिकायत हर साल होती है। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से भौतिक सत्यापन भी कराया जाता है। इसके बाद भी इस गोरखधंधे पर रोक नहीं लग पा रही है। पिछले दिनों हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी अभी तक पंजीकरण की गड़बड़झाला बदस्तूर जारी है। बोर्ड के साथ कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि केंद्र बनाए जाने से पहले विद्यालय में छात्रों की वास्तविक संख्या का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। लेकिन हर साल विद्यालयों में सत्यापन के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि केंद्र बनाए जाने वाले विद्यालयों में पहले भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। अगर कहीं गड़बड़ पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीएसए मुन्ने अली ने बताया कि इस प्रकार की शिकायतें मिल रहीं है कि पांचवीं तक मान्यता लेकर आगे की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। इन विद्यालयों की जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे विद्यालय संचालकों के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए हैं।


मार्कशीट मिलने पर पता चलता है खेल
अपने यहां पंजीकरण कराकर दूसरे विद्यालयों से बोर्ड परीक्षा फार्म भरवाने के खेल में हर साल हजारों बच्चे फंस जाते हैं। अंतिम समय तक बताया ही नहीं जाता है कि उनका फार्म किसी और विद्यालय से भरवाया गया है। बच्चों को धोखे का पता तब चलता है जब मार्कशीट हाथ में आती है। फीस वे संस्थागत छात्र के तौर पर करते हैं और मार्कशीट व्यक्तिगत की मिलती है।
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