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डिलारी से पकड़ी हथियारों की फैक्ट्री

Moradabad

Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST

मुरादाबाद। अपराधियों की धरपकड़ के अभियान में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी। डिलारी के नाखूनका गांव के जंगल में छापा मारकर पुलिस ने देशी हथियारों की फैक्ट्री पकड़ी। मौके से दर्जन भर बने और अधबने तमंचे, बंदूक और उन्हें बनाने की मशीनें व उपकरण मिले। तमंचे बनाने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार कर बाकी साथियों की तलाश की जा रही है।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रविवार शाम नाखूनका गांव के बाहर एक स्थान पर छापा मारा। यहां झोपड़ी में दो युवक हथियार बनाते मिले। पकड़े गए युवकों के नाम इकबाल पुत्र नत्थू बढ़ई निवासी फरीदपुर और असलम पुत्र मो. जान निवासी मानपुर डिलारी हैं। एसपी ग्रामीण अनिल कुमार ने बताया कि मौके से पुलिस को 315 बोर के दो नए तमंचे, पांच अधबने तमंचे, मरम्मत के लिए आया 315 बोर का एक तमंचा, 12 बोर का तमंचा, 12 बोर की एक बंदूक समेत भारी संख्या में कच्चा माल बरामद हुआ। साथ ही तमंचा व बंदूक बनाने के लिए ड्रिल मशीन, पंखा, रेती, बाक, शिकंजा, छैनी, स्प्रिंग, वर्मा, नाल का बोर बनाने के लिए रेमर व कई तरह के औजार मिले।
बदमाशों ने बताया कि वह आठ साल से बदमाशों को हथियार बनाकर दे रहे थे। आर्डर मिलने पर काम शुरू करते थे और जंगलों में ही काम पूरा करके लौट आते थे। ज्यादातर माल उत्तराखंड, यूपी के विभिन्न जिलों और हरियाणा में सप्लाई होता था। फोन पर आर्डर लिए जाते थे और सैंपल बनाकर उसे भेज दिया जाता था। इसके बाद माल की एक चौथाई रकम लेकर काम शुरू किया जाता था। पकडे़ गए युवकों ने बताया कि अब तक उन्होंने 5000 से ज्यादा असलहे बनाकर बेच दिए। उनके बाकी साथियों की तलाश की जा रही है।
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1500 रुपये में मौत का सामान
युवकों ने बताया कि वह बदमाशों को केवल 1500 से 2000 रुपये में 12 या 315 बोर का तमंचा बनाकर देते थे। बंदूक से ज्यादा डिमांड तमंचों की है। चुनाव के दौरान उनके पास एक पल की भी फुर्सत नहीं थी। अधिकांश आर्डर उत्तराखंड से मिले थे।
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पिस्टल और रिवाल्वर के भी मास्टर
इकबाल देशी तमंचे बनाने का एक्सपर्ट है, लेकिन आर्डर मिलने पर रिवाल्वर और पिस्टल भी तैयार कर देता है। एक दिन में वह दो तमंचे आसानी से बना देता है, जबकि पिस्टल बनाने में उसे दो दिन लग जाते हैं। यह काम उसने अपने पिता नत्थू से सीखा। नत्थू भी तमंचे बनाने में माहिर था।
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