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प्रदेश में अब खुला बड़ा ‘टारगेट घोटाला’

Moradabad

Updated Sun, 09 Sep 2012 12:00 PM IST

मुरादाबाद। प्रदेश में अब एक नया और अनोखा ‘घोटाला’ सामने आया है। ऐसा घोटाला जिसे रुपये कमाने के लिए नहीं बल्कि अफसरों ने इसलिए अंजाम दिया ताकि सरकार से वाहवाही लूट सकें। आमदनी अधिक दिखाने का यह खेल खेला गया रजिस्ट्री विभाग में। स्टांप बिक्री का दो फीसदी हिस्सा जो निकायों के लिए अलग कर दिया जाना चाहिए उसे अपने विभाग की आमदनी बता दी गई। दस करोड़ रुपये से अधिक का घालमेल तो मुरादाबाद में ही किया गया है। सूबे के कई जिलों में ऐसे घोटाले का खुलासा हुआ है। इस कागजी ‘घोटाले’ की वजह से शहरों के विकास पर खर्च किया जाने वाला पैसा दूसरी मदों में चला गया।
यह ‘गोलमाल’ पिछले दो वर्षों से चल रहा है। हर बैनामे पर जो दो प्रतिशत का विकास शुल्क लिया जाता है वह निकायों को न देकर रजिस्ट्री विभाग अपनी आमदनी में जोड़ता रहा। टारगेट पूरा करने के लिए विकास का पैसा सरकार के खाते में डाल दिया गया। सरकार ने भी इस पैसे को अपनी उपलब्धि मानते हुए दूसरे मदों में लगा दिया। अब जब निकायों से विकास शुल्क के बिल पहुंचे तो हड़कंप मचा। मंडलायुक्त सुरेंद्र कुमार वर्मा ने आनन फानन में जांच बैठा दी। मुरादाबाद का ही 10 करोड़ रुपया फंस गया। प्रदेश में विकास शुल्क का पैसा सर्वाधिक मुरादाबाद, मेरठ, अलीगढ़, गोरखपुर, मथुरा, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, इलाहाबाद और बरेली में मिलता है। इस रकम से विकास के काम कराए जाते हैं।


क्या है विकास शुल्क
मुरादाबाद। एक बैनामे पर सात प्रतिशत स्टांप ड्यूटी ली जाती है। जिसमें से पांच फीसदी तो सरकार का अपना पैसा हो गया और दो प्रतिशत निकायों को डेवलपमेंट के मद में दिया जाता है।




अफसरों ने मिलकर खेला ‘खेल’
मुरादाबाद। स्टांप विभाग के अफसरों ने यह खेल मिलकर खेला है। दरअसल जब शासन स्तर पर समीक्षा होती है तो कुल आय में से दो प्रतिशत घटा दिया जाता है। लिहाजा अफसरों ने विकास शुल्क के दो फीसदी को छुपाकर अपनी आमदनी में ही दर्शा दिया था। जिससे निकायों का पैसा फंस गया।


निकायों ने भी नहीं भेजे बिल
मुरादाबाद। नगर निगम, नगरपालिका, प्राधिकरण और आवास विकास ने भी विकास शुल्क के लिए बिल नहीं बनाए थे। नियम यह है कि इन निकायों को अपने बजट के लिए एआईजी स्टांप के यहां बिल भेजना पड़ता है। यह बिल ट्रेजरी में चला जाता है और वहां से इनके खातों में बजट जारी हो जाता है।
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