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बदहाल व्यवस्था से दरक रही शिक्षा की नींव

मिर्जापुर, ब्यूरो, अमर उजाला,

Updated Thu, 01 Dec 2016 01:00 AM IST
Education is the foundation of the system cracks desecrated

मुसफ्फरगंज स्थित जर्जर भवन में चल रहा प्राथमिक विद्यालय ।

सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद अभी परिषदीय विद्यालयों को मानक के अनुरूप नहीं बनाया जा सका है। यही वजह है कि विद्यार्थी जमीन पर बैठ कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में अभी तक पाठ्य पुस्तकों का वितरण नहीं हुआ है, जबकि छमाही परीक्षा सिर पर  आ चुकी है। कंप्यूटर शिक्षा की बात सोचना भी यहां बेमानी   है, क्योंकि मात्र 25 फीसदी विद्यालयों तक ही बिजली की पहुंच हो सकी है।
   जिले के स्कूल सुविधाओं से काफी दूर हैं। न तो शौचालय मानक के अनुरूप हैं और न ही मेनू के अनुरूप बच्चों को भोजन ही मिल पाता है। कई विद्यालय भवन तो बेहद जर्जर हैं जिनमें बैठ कर शिक्षा ग्रहण करना मौत से खेलने के समान है। जिलेे में  कुल 2210 विद्यालय हैं जिनमें तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें 1611  प्राथमिक विद्यालय और 599 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें 30 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति  है। जिले में कुल छह हजार शिक्षक कार्यरत हैँ लेकिन यह संख्या भी छात्रों को गुणवान बनाने के लिए काफी नहीं है।

  शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी दो हजार शिक्षकों की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन के आंकड़ों को देखें तो 90 फीसदी शौचालय बन गए हैं लेकिन हकीकत इससे जुदा है। कई शौचालय मानक के अनुरूप नहीं हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी मनभरन राजभर इसे स्वीकार भी करते हैं। उनका कहना है कि शौचालयों को मानक के अनुरूप बनाने के लिए जिलाधिकारी के पास आवेदन भेजा गया है। आंकड़ें बताते हैँ कि दस फीसदी विद्यालय अभी भी शौचालय विहीन हैं। इन विद्यालयों के बच्चों को मजबूरी में बाहर लघुशंका और शौच करने जाना पड़ता है।

   अधिकांश विद्यालयों में बच्चे टाट पट्टी पर बैठ कर ही शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। जाड़े के दिनों में टाट पट्टी को जमीन पर बिछा कर उन पर बैठना काफी कष्टप्रद साबित होता है। विद्यालयों में बिजली की पहुंच नहीं होने के कारण गर्मी के दिनों में पंखे नहीं चल पाते हैं। कंप्यूटर की पढ़ाई तो अभी दूर की बात है। विद्यालयों में अभी भी उपली और लकड़ी पर मिड डे मील पकाने की व्यवस्था है। जिले में अभी भी पांच विद्यालय किराये के मकान में चल रहे हैं।
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