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खाता होगा भारी, जेब रहेगी खाली

मिर्जापुर, ब्यूरो, अमर उजाला,

Updated Thu, 01 Dec 2016 01:05 AM IST
Account will be massive, will remain empty pockets

अमर उजाला ब्यूरो मिर्जापुर। सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद अभी परिषदीय विद्यालयों को मानक के अनुरूप नहीं बनाया जा सका है। यही वजह है कि विद्यार्थी जमीन पर बैठ कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में अभी तक पाठ्य पुस्तकों का वितरण नहीं हुआ है, जबकि छमाही परीक्षा सिर पर आ चुकी है। कंप्यूटर शिक्षा की बात सोचना भी यहां बेमानी है, क्योंकि मात्र 25 फीसदी विद्यालयों तक ही बिजली की पहुंच हो सकी है। जिले के स्कूल सुविधाओं से काफी दूर हैं। न तो शौचालय मानक के अनुरूप हैं और न ही मेनू के अनुरूप बच्चों को भोजन ही मिल पाता है। कई विद्यालय भवन तो बेहद जर्जर हैं जिनमें बैठ कर शिक्षा ग्रहण करना मौत से खेलने के समान है। जिलेे में कुल 2210 विद्यालय हैं जिनमें तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें 1611 प्राथमिक विद्यालय और 599 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें 30 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति है। जिले में कुल छह हजार शिक्षक कार्यरत हैँ लेकिन यह संख्या भी छात्रों को गुणवान बनाने के लिए काफी नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी दो हजार शिक्षकों की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन के आंकड़ों को देखें तो 90 फीसदी शौचालय बन गए हैं लेकिन हकीकत इससे जुदा है। कई शौचालय मानक के अनुरूप नहीं हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी मनभरन राजभर इसे स्वीकार भी करते हैं। उनका कहना है कि शौचालयों को मानक के अनुरूप बनाने के लिए जिलाधिकारी के पास आवेदन भेजा गया है। आंकड़ें बताते हैँ कि दस फीसदी विद्यालय अभी भी शौचालय विहीन हैं। इन विद्यालयों के बच्चों को मजबूरी में बाहर लघुशंका और शौच करने जाना पड़ता है। अधिकांश विद्यालयों में बच्चे टाट पट्टी पर बैठ कर ही शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। जाड़े के दिनों में टाट पट्टी को जमीन पर बिछा कर उन पर बैठना काफी कष्टप्रद साबित होता है। विद्यालयों में बिजली की पहुंच नहीं होने के कारण गर्मी के दिनों में पंखे नहीं चल पाते हैं। कंप्यूटर की पढ़ाई तो अभी दूर की बात है। विद्यालयों में अभी भी उपली और लकड़ी पर मिड डे मील पकाने की व्यवस्था है। जिले में अभी भी पांच विद्यालय किराये के मकान में चल रहे हैं।

नोटबंदी के इफेक्ट से बैंक के कर्मचारियों को अभी राहत मिलती नहीं दिख रही है। बैंकों में गुरुवार से फिर भीड़ बढ़ जाएगी। अब पेंशन और वेतन निकालने के लिए कर्मचारी और पूर्व कर्मचारी बैंकों का रुख करेंगे। मंगलवार को ही जिला कोषागार से लगभग डेढ अरब रुपये वेतन और पेंशन फंड में भेजे गए हैं। बैंकों में कर्मचारी अब इन्हें कैसे संभालेंगे यह देखने वाली बात होगी।
  बता दें जिले में विभिन्न विभागों में वेतन बांटे जाने के लिए ट्रेजरी विभाग से एक अरब से अधिक रुपये बैंकों को ट्रांसफर कर दिए गए हैं। इसी तरह पेंशन के लिए 20 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। वेतन में देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 35 करोड़, माध्यमिक विद्यालयों  में कार्यरत लोगों के वेतन के लिए 20 करोड़ रुपये रुपये इसी तरह पुलिस और पीएसी विभागों के वेतन की रकम शामिल है।

  जिले के कर्मचारियों को वेतन और पूर्व कर्मचारियों को पेंशन देने का कार्य हर माह की एक तारीख से शुरु हो जाता है। बैंकों के कर्मचारियों का वेतन हर माह 25 तारीख को ही आ जाता है। कई बैंककर्मियों ने इसे निकालना भी शुरु कर दिया है। अब वेतन और पेंशन की राशि को निकालने के लिए लाइनें लगेंगी। अग्रणी बैंक मैनेजर दिनकर सिंह का कहना है कि बैंकों में कोई विशेष तैयारी नहीं की गई है। पहले से ही बैंककर्मी परेशान हैं। आम दिनों की तरह ही कार्य किया जाएगा।

रही बात बैंक से कैश निकालने की तो तय सीमा तक ही लोगों को कैश दिया जाएगा। कैश कम होने पर थोड़ी थोड़ी राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह निर्भर करेगा कि स्टेट बैंक से अन्य बैंकों को कितना कैश मिलता है। उधर सरकारी कर्मचारी महीने भर की मेहनत की कमाई बैंकों में पहुंचने पर उसे निकालने के लिए लालायित  हैं। कोषागार से  सरकारी कर्मचारियों का वेतन बैंकों को भेज दिया गया है। इसी प्रकार विभागों ने भी समाजवादी पेंशन,विकलांग पेंशन, वृद्धा पेंशन और अन्य कई तरह के पेंशन की राशि को बैंकों को भेज दिया है।
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