आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

रियासतदारी, दबंगई व रईसी का साहित्य दरबार हुआ जमींदोज

Mirzapur

Updated Sat, 01 Sep 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। रियासतदारी, दबंगई और रईसी का ऐसा साहित्य दरबार जिसमें आने से आचार्य रामचंद्र शुक्ला जैसे कालजयी साहित्यकार भी घबराते थे, उसका आज नामोनिशा तक नहीं रहा। हिंदी साहित्य में समालोचना के प्रथम आचार्य माने जाने वाले प्रेमघन की नगर के तिवरानी टोला में स्थित कोठी जमींदोज हो गई। अतीत की चमकदार तस्वीर में लिपटी हिंदी साहित्य के पितामह चौधरी बद्री नारायण प्रेमघन की कोठी का अस्तित्व उस वक्त समाप्त किया जा रहा है जब प्रेमघन का जयंती शताब्दी वर्ष चल रहा है। यह अक्खड़ मिजाजी साहित्यकार इसी कोठी में वर्ष 1912 में पैदा हुआ था।
पूर्वजाें की इस कोठी में प्रेमघन ने आनंद कादंबिनी नामक प्रेस की स्थापना की और मिर्जापुर की पहली साहित्यिक मासिक पत्रिका आनंद कादंबिनी का प्रकाशन संवत 1938 में शुरू किया। आनंद कादंबिनी में ही प्रेमघन ने श्रीनिवासदास के संयोगिता स्वयंवर का विस्तृत आलोचना कर हिंदी में इसे आधुनिक आलोचना साहित्य होने का गौरव दिलाया। बाद में इसी प्रेस से नागरी नीरद और पोएट पत्रिकाएं प्रकाशित हुईं।
हिंदी साहित्य के पितामह चौधरी बद्री नारायण प्रेमघन अपने पूर्वजों की इस कोठी में लगने वाले साहित्य दरबार में राजा की तरह रंग-बिरंगी पोशाक पहन कर अपनी दबंगई और रईसी का प्रदर्शन करते थे। वह भारतेंदु मंडल के प्रमुख साहित्यकार थे। इसीलिए मंडल के प्रत्येक साहित्यकार का मिर्जापुर में प्रेमघन की कोठी से गहरा सरोकार था। भारतेंदु का इस कोठी से विशेष लगाव रहा। पूर्वजाें की इस कोठी को साहित्य साधना का केंद्र बनाकर प्रेमघन ने इस कोठी को भी हिंदी साहित्य के इतिहास में स्थान दिलाया है जिसका जिक्र बारबार में प्रेमघन निवासी के रूप में आता रहता है। मुख्यत: चार खंडों क्रमश: नागरी निकुंज, कोठी गंगा और अस्तबल में बंटी इस कोठी में एक विशाल नाच घर भी था। इसी पर मंच बनाकर नौ जागरण का संदेश देने वाले कई नाटक खेले गए। इनमें वारांगना रहस्य और भारत सौभाग्य आदि प्रमुख हैं। ये नाटक प्रेमघन द्वारा बनाई गई प्रेमघन नागरी नाट्य समिति द्वारा प्रस्तुत किए जाते रहे जिनमें भारतेंदु हरिशचंद्र नायक और प्रेमघन स्वयं नायिका का रोल निभाते थे।
ब्रज रत्नदास ने लिखा है कि प्रेमघन भारतेंदु के अंतरंग मित्राें में थे और दोनाें में ऐसा प्रेम हो गया था जब ये काशी या मिर्जापुर आते जाते थे तो एक दूसरे के निवास पर ही ठहरते थे। प्रेमघन के साहित्य मित्र मडंली में भारतेंदु जी के साथ ही पंडित प्रताप नारायण मिश्र, पंडित अंबिका दत्त व्यास, कृष्ण देव शरण सिंह (राजकु मार भरतपुर) और बाबा राधा कृष्ण दास आदि प्रमुख थे।
प्रेमघन का युग गोष्ठियाें का युग रहा। जितनी साहित्यक गोष्ठियां उनकी कोठी पर हुई और जितने साहित्यकार इनमें आए वैसा उदाहरण हिंदी साहित्य के इतिहास में कम ही मिलता है। कोठी में ही भाषा और समाज सुधार पर भी गोष्ठियां हुई। इस कोठी में प्रेमघन का बहुत बड़ा पुस्तकालय भी था उचित रख रखाव के अभाव में कुछ पुस्तकें नष्ट हो गई और कुछ प्रेमघन के परिजनाें के पास सुरक्षित हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वर्तमान में ये गोंडा जिले के शीतल गंज में रह रहे हैं।
कई दशकों तक अत्यंत जर्जर अवस्था में खंडहर में तब्दील प्रेमघन की कोठी जमींदोज हो रही है। इस कोठी में बहुत दिनाें तक बर्तन गलाने का कार्य भी हुआ। बताया गया कि कोठी को नगर के एक व्यापारी ने खरीद लिया है।
सौ साल पूर्व प्रेमघन का जन्म इसी कोठी में हुआ था
मिर्जापुर। प्रेमघन का जन्म धनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आजमगढ़ जनपद के मूल निवासी प्रेमघन के दादा शीतला प्रसाद उपाध्याय अंग्रेजी हुकूमत में बड़े ठेकेदाराें में से एक थे। उन्होंने ही इस कोठी का निर्माण कराया, जिसका नाम चौधरी साहब की कोठी रखा गया। शीतला प्रसाद के एकमात्र पुत्र गुरुचरण लाल के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में प्रेमघन का जन्म इसी कोठी में सन 1912 में हुआ। यहां शिक्षा ग्रहण करने के बाद लगभग 25 वर्ष की अवस्था में अपनी पहली साहित्यिक रचना भी उन्होंने यहीं की।
प्रेमघन मार्ग का नामकरण तो हुआ पर धरोहरों को सुरक्षित नहीं किया
मिर्जापुर। नगर पालिका परिषद द्वारा सन 1970 में इस मार्ग का नाम प्रेमघन मार्ग कर दिया गया लेकिन किसी ने कभी इस ऐतिहासिक धरोहर की सुधि नहीं ली और न ही आज तक नगर में प्रेमघन की साहित्यिक धरोहराें को संजोने के लिए कोई संग्रहालय का निर्माण हुआ। पीढ़ी दर पीढ़ी सुनहरे अतीत की वैसी ही चमकदार दिख सके इसके लिए कभी भी प्रेमघन के कोठी की सुरक्षा और उनके साहित्याें को सहेजने की जरूरत नहीं समझी गई।
---
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

radiators dabangai

स्पॉटलाइट

सुभाष घई की 'हीरोइन' ने किया 38 साल बड़े हीरो के साथ लवमेकिंग सीन, तस्वीर वायरल

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

आशा पारेख की बायोग्राफी लॉन्च करेंगे सलमान खान

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

इन्वर्टिस के मेधावी छात्र वैभव सिंह बने आई.ए.एस

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

ये हैं जियो के सभी बैलेंस पता करने वाले USSD कोड

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

फिल्म 'स्पाइडर मैन होमकमिंग' का टीजर रिलीज

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

Most Read

योगी सरकार के इस ऑर्डर ने उड़ाये ‘गुरुओं के होश’

yogi government orders surprised teacher
  • बुधवार, 29 मार्च 2017
  • +

छात्रा बनकर थाने पहुंचीं सीओ ने दी तहरीर, मुंशी ने दर्ज नहीं की रिपोर्ट    

CO Vandana Sharma
  • सोमवार, 27 मार्च 2017
  • +

तीन तलाक के विरोध में हिंदू लड़के से किया विवाह

Jodhpur: Muslim Girl Marriage With Hindu Boy
  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

योगीराज में सूबे की चर्चित जिलाधिकारी बी. चंद्रकला प्रतिनियुक्ति पर पहुंचीं दिल्ली

Yogiraj discussed the District Magistrate B. chandrakala Delhi reached deputation
  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

सीएम आदित्यनाथ कल प्रवेश करेंगे मुख्यमंत्री आवास में, देंगे फलाहारी पार्टी

Chief Minister adityanath grah pravesh tomorrow.
  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

एक्‍शन मोड में योगी सरकार, बनारस के 15 थानों पर नए थानेदार

Yogi Sarkar in action mode, new SHO at 15 locations in varanasi
  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top