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सही इलाज के अभाव में बालक ने दम तोड़ा

Mirzapur

Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। कहने के लिए तो यह मंडलीय अस्पताल है लेकिन बच्चाें को देखने वाला कोई बाल रोग चिकित्सक यहां तैनात नहीं है। सरकार इस अस्पताल पर भारी भरकम बजट खर्च कर रही है पर यहां करीब एक माह से बच्चाें का इलाज नहीं हो रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के साथ ही चिल्ड्रेन वार्ड में भी ताला बंद है। यह स्थिति तब है जबकि इसी अस्पताल के एक भाग में स्थित डब्ल्यूएचओ व यूनिसेफ के कार्यालयों में इनके आला अफसर भी यहीं बैठते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के इन नुमाइंदाें को भी स्वास्थ्य एवं जिला प्रशासन की तरह ही बच्चाें की चिंता नहीं है। इस लापरवाही के चलते काफी जद्दोजहद के बाद शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती हुए एक बालक की जहां मौत हो गई जबकि उसकी बहन अस्पताल के गेट पर ही तड़पती रही।
शनिवार को मड़िहान थाना क्षेत्र के पचोखरा गांव निवासी राकेश अपने दो वर्ष के पुत्र विक्रम व पांच साल की पुत्री नैना जिसकी हालत काफी नाजुक थी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा था। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक यह कह कर कि वे बच्चाें के नहीं बड़ाें के डाक्टर हैं, बच्चों का उपचार नहीं कर रहे थे। काफी जद्दोजहद के बाद दो वर्षीय विक्रम को तो अस्पताल में भर्ती किया गया पर उसे बाल रोग चिकित्सक ने नहीं जनरल फिजीशन ने ही देखा और शनिवार की रात में ही बालक की मौत हो गई जबकि उसकी बहन अस्पताल गेट पर ही बुखार से तड़पती रही।
बता दें कि राजेश के दोनों बच्चे पिछले पांच दिनाें से बुखार व उल्टी दस्त से पीड़ित थे। 14 अगस्त को वह बच्चाें का इलाज कराने मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। चिकित्सक ने उसे मिर्जापुर भेज दिया तो राकेश दोनाें बच्चाें को लेकर 14 अगस्त को ही मंडलीय अस्पताल पहुंचा, जहां आपात कक्ष के चिकित्सकाें ने उसे महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ लक्ष्मीशंकर सिंह के पास भेज दिया। बच्चाें को देखने के बाद चिकित्सक ने उन्हें किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती करने की सलाह देकर टरका दिया। इसके बाद राकेश व उनके परिवार के लोग चार दिन तक कई निजी नर्सिंग होम में भटकते रहे। थक हारकर परिजन शनिवार 18 अगस्त को दोबारा मंडलीय अस्पताल पहुंचे पर डाक्टर नहीं मिले। परिजन इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक से बच्चाें को देखने की गुहार लगाते रहे लेकिन चिकित्सक यहीं रट लगाए रहे कि वह बच्चाें के नहीं हैं। लाचार परिजन यहां तक बोल दिए कि डाक्टर साहब आप देखैं तो सही जऊन होए तौन होए। बाद में लोगों के दबाव में बालक विक्रम को तो भर्ती किया गया पर उसकी बहन को नहीं लिया गया।
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