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यदुनाथ सिंह ने माफ कराया था रामनगर पुल का पथकर

Mirzapur

Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
शेरवां। चुनार विधानसभा से लगातार चार बार विधायक चुने गए यदुनाथ सिंह ने बीएचयू में छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र श्री सिंह ने आंदोलन करके रामनगर पीपा पुल पर हो रही पथकर की वसूली को बंद करा दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की सभा में हंगामा करने के आरोप में इन्हें मीसा के तहत जेल में भी डाल दिया गया था।
यदुनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बीएचयू में छात्र आंदोलन से की थी। वह खुद रिक्शा चलाकर पढ़ने के लिए जाया करते थे। रामनगर पीपा पुल के पथकर को माफ करने के लिए उन्होंने बड़ा आंदोलन किया था। जिस पर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलाधिपति प्रो. प्रभु नारायण सिंह जो कि काशी नरेश के नाम से भी जाने जाते थे उन्होंने पथकर माफ करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद 1974 में आंदोलन करके कई इंटर कालेजों में भी बच्चों की फीस माफ कराया। 1974 में पुलिस व रामनगर पुल के ठेकेदारों ने उन्हें रामनगर पीपा पुल पर घेर लिया था। उनसे बचने के लिए यदुनाथ ने गंगा में छलांग लगा दी और डुबकी लगाकर पड़ाव स्थित डोमरी गांव के पास निकल गए। वहां मल्लाहों के यहां शरण लिया। इसके बाद 1977 में इमरजेंसी के विरोध में उन्होंने तेलियाबाग में पटेल स्मारक पर आयोजित पटेल जयंती समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के सभा में मंच पर पहुंच गए और सरकार के खिलाफ भाषण बाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उनहें गिरफ्तार कर मीसा के तहत जेल में डाल दिया। 1974 में इन्होंने राम नगर मुगलसराय विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और लोकदल के प्रत्याशी से महज 423 मतों से पराजित हो गए। इसके बाद यह वाराणसी छोड़कर चुनार अपने पैतृक गांव आ गए और चुनार विधानसभा से चुनाव लड़ा। यहां उन्होंने पूर्व पर्यटन राज्य मंत्री शिवराज तिवारी व तत्कालीन जेल व न्याय मंत्री ओम प्रकाश सिंह को पराजित किया। यदुनाथ 48000 मत पाकर विजयी हुए थे। जबकि शिवदास तिवारी को 2600, ओम प्रकाश सिंह को 20 हजार, रमाशंकर सिंह को 24 हजार मत मिले। कांग्रेस के रमाशंकर को छोड़कर शेष सभी की जमानत जब्त हो गई थी। इस हार का बदला ओम प्रकाश सिंह ने यदुनाथ को पराजित कर 1983 में लिया। इस समय ओम प्रकाश एमएलसी थे और प्रदेश के सिंचाई एवं बाढ़ मंत्री भी थे। 1993 में भी यदुनाथ को पराजय मिली।
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