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मेडिकल कॉलेज में बजट मिल रहा मोटा, फिर भी दवाओं का टोटा

अमर उजाला ब्यूरो

Updated Sat, 14 Jan 2017 10:55 AM IST
budget mil raha mota

फाइल फोटोPC: अमर उजाला

मेडिकल चिकित्सा और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को मोटा बजट मिलने के बाद भी स्वास्थ्य सेवा पटरी से उतरी हुई है। तीन माह से मेडिकल कॉलेज में दवा खरीद नहीं हो पाई है। वहीं जिले की सीएचसी और पीएचसी पर जरूरत की दवाएं भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण मरीजों को रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज चिकित्सा से संबद्ध है और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित होते हैं। इन्हीं विभागों के अधीन स्वास्थ्य सेवा के लिए भवन बनाने और उपकरण खरीदने के लिए मोटा बजट खर्च किया जा रहा है। वहीं दवाओं की खरीद पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। मेडिकल कॉलेज को करीब 4 करोड़ रुपये का बजट दवा खरीद के लिए दिया गया था। कॉलेज प्रशासन डेंगू व वायरल सीजन के चलते मरीजों का बोझ बढ़ने के कारण सारा बजट खर्च दिखा रहा है। मेडिकल कॉलेज में तीन माह से दवाओं का टोटा है।

जरूरत की इंजेक्शन भी नहीं उपलब्ध
मेडिकल कॉलेज में हैवी एंटीबायोटिक से लेकर सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाले तमाम इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। कॉलेज प्रशासन पर दवा खरीद में भारी घोटाले का आरोप लग रहा है। क्योंकि करीब डेढ़ करोड़ रुपये 24 घंटे लैब संचालित करने के लिए केमिकल खरीदने पर खर्च किया गया है। वहीं मेडिकल कर्मचारी एसोसिएशन आरोप लगा रही है कि दवा खरीद में भारी खेल हुआ है। शुक्रवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन त्यागी और अन्य पदाधिकारी सीएमएस डॉ. विभु साहनी से मिले। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी टेंडर या कोटेशन के 20 हजार रुपये से कम बजट वाली चीजें मेडिकल कॉलेज किस्तों में खरीद रहा है। ये न्यूनतम दरों पर नहीं खरीदी जा रही।

इलाज की स्थिति
कुल बेड -  1040
संचालित -  करीब 500 बेड

स्वास्थ्य केंद्र की हालत खराब
बीते दिनों एडी ने माछरा और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया था। स्वास्थ्य केंद्रों में सीरिंज, ड्रिप सैट, मरीजों के लिए कंबल, बेड पर चादर तक उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद सीएमओ कार्यालय स्थित दवा गोदाम पर भी छापा मारा गया। इसमें सामने आया कि कई बेसिक दवाएं गोदाम में भी उपलब्ध नहीं है। अब पता चल रहा है कि मोटा बजट जिला स्वास्थ्य विभाग के पास पड़ा है, लेकिन बीते करीब ढाई महीने से कोई खरीद नहीं की गई है। अब आचार संहिता के बीच बड़े पैमाने पर बिना चुनाव आयोग की स्वीकृति के दवा नहीं खरीदी जा सकती है।  ऐसे में दवा खरीदने में स्वास्थ्य विभाग भी अपने हाथ पीछे खींच रहा है।

जिले में कुल सीएचसी - 13
एडिशनल पीएचसी  - 31
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