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ट्रेन में साढ़े छह घंटे पड़ा रहा शव

Meerut

Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। रेलवे और जीआरपी की मानवता किस हद तक मर चुकी है, इसका नजारा मंगलवार को सिटी स्टेशन पर देखने को मिला। सहायक वाणिज्य कर अधिकारी का शव नौचंदी एक्सप्रेस के शौचालय में साढ़े छह घंटे तक पड़ा रहा लेकिन किसी ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं ली। शव मिलने का मीमो रेलवे अस्पताल से स्टेशन मास्टर, जीआरपी और आरपीएफ थाने घूमता रहा।
मंगलवार को नौचंदी एक्सप्रेस सुबह करीब 9 बजे सिटी स्टेशन पहुंची थी। यहां से नौचंदी एक्सप्रेस को मेंटिनेंस के लिए वाशिंग लाइन भेज दिया गया। कैरिज एंड वैगन विभाग के एसएसई चंपत लाल ने गाड़ी को चेक किया तो स्लीपर कोच एस-4 (05245) का शौचालय अंदर से बंद मिला। शीशे से अंदर देखा तो वहां एक व्यक्ति पड़ा दिखाई दिया। चंपत ने बताया कि इसकी जानकारी जीआरपी और आरपीएफ थाने को दी गई। जीआरपी की ओर से कोई नहीं आया। 10 बजे आरपीएफ का एक जवान मौके पर आया और देखकर चला गया। दोनों थानों ने एक दूसरे के पाले में गेंद डालते हुए मीमो की मांग की। वह मीमो लेकर गया तो उस पर व्यक्ति के मृत या जिंदा होने की जानकारी लिखने को कहा। चंपत ने बिना मेडिकल रिपोर्ट के कुछ भी लिखने से मना कर दिया। इसके बाद चंपत मीमो लेकर रेलवे अस्पताल गया लेकिन वहां सीनियर डीएमओ डॉ. ललित कुमार नहीं मिले। उनका सहायक सूरज यादव मौके पर आया लेकिन शौचालय नहीं खुलने के कारण बिना देखे ही लौट गया। बिना शव निकाले गाड़ी की मेंटिनेंस नहीं होने और शाम को लखनऊ नहीं भेजे जाने की धमकी के बाद शाम करीब साढ़े तीन बजे जीआरपी ने मीमो लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उधर, जीआरपी एसओ राकेश कुमार यादव ने बताया आरोप बेबुनियाद है। उनके पास शाम साढ़े तीन बजे मीमो आया था। आरपीएफ इंस्पेक्टर आरके यादव ने बताया कि व्यक्ति मर चुका था इसलिए मामला आरपीएफ का नहीं बनता था।
मृत और जीवित में पड़ा रहा शव ः निर्मल श्रीवास्तव का शव मृत और जीवित होने के फेर में साढ़े छह घंटे तक टायलेट में ही पड़ा रहा। चंपत लाल ने बताया कि जीआरपी ने कहा व्यक्ति जीवित है तो आरपीएफ का केस है।
अधिवेशन में भाग लेने आए थे मेरठ
शव की पहचान लखनऊ में सहायक वाणिज्य कर अधिकारी निर्मल श्रीवास्तव के रूप में हुई। जीआरपी ने बताया कि निर्मल श्रीवास्तव विभागीय अधिवेशन में भाग लेने आए थे। इनके साथ दूसरे साथी भी थे। श्रीवास्तव की मौत संभवत: दिल का दौरा पड़ने से हुई है। सुबह इनके साथी ट्रेन से उतरकर अधिवेशन स्थल की ओर निकल गए।
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