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ब्रिटिश हुकूमत जैसा बर्ताव कर रहे बोर्ड अध्यक्ष

Meerut

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। जनहित के मुद्दों पर एक हुए छावनी बोर्ड सदस्यों ने सोमवार को कैंट प्रशासन और जीओसी के तानाशाही रवैये के खिलाफ हल्ला बोल दिया। सदस्य स्थानीय जनता के साथ बोर्ड कार्यालय पहुंचे, लेकिन सीईओ ने गेट बंद करवाकर उन्हें घुसने ही नहीं दिया। आक्रोशित सदस्यों ने कैंट प्रशासन और सब एरिया कमांडर (बोर्ड अध्यक्ष) पर गंभीर आरोप लगाए। सदस्यों ने चेतावनी दी कि जब तक विकास कार्य और बढ़े हुए टैक्स वापस नहीं लिए जाएंगे बोर्ड बैठकों का बहिष्कार जारी रहेगा।
छावनी बोर्ड उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी के नेतृत्व में सदस्य और स्थानीय जनता पौने बारह बजे छावनी परिषद पहुंचे। सदस्य के आने से पहले ही कैंट बोर्ड सीईओ प्रशोतम लाल ने गेट बंद करवा दिया। सदस्य जगमोहन शाकाल ने सीईओ से फोन पर बात की और गेट खोलने का अनुरोध किया, लेकिन सीईओ ने किसी की एक न सुनी। इसके बाद सदस्यों ने गेट के बाहर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। दिनेश गोयल ने कहा कि बोर्ड में सुविधा शुल्क पर काम हो रहा है और कैंट प्रशासन सब एरिया मुख्यालय से संचालित हो रहा है। जगमोहन शाकाल ने कहा कि बोर्ड अध्यक्ष एवं कैंट सीईओ अंग्रेजी कानून चला रहे हैं और बोर्ड पैसे लेकर जमीनों पर अवैध कब्जे करा रहा है। अजमल कमाल ने कहा कि सब एरिया कमांडर जब से आए हैं माल रोड को चमकाने में लगे हैं और जीओसी के कहने पर ही गेट बंद कराया गया है। वार्ड के विकास में किसी का ध्यान नहीं है।
ऑल इंडिया कैंटोनमेंट वाइस प्रेसिडेंट मेंबर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप गुप्ता ने कहा कि वे इस मामले को रक्षा मंत्रालय तक ले जाएंगे। बीना वाधवा ने कहा कैंट बोर्ड का गठन जनता की सुविधा के लिए हुआ था, लेकिन यहां सिर्फ उनका उत्पीड़न हो रहा है। सीईओ ने एक बजे गेट के बाहर आकर सदस्यों से ज्ञापन लिया। 21 सूत्रीय ज्ञापन की प्रति छावनी बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव से लेकर रक्षा मंत्रालय तक भेजी गई। छावनी परिषद का मुख्य गेट बंद करने से नाराज क्षेत्रीय जनता ने सीईओ के खिलाफ नारे भी लगाए। विरोध प्रदर्शन में पूर्व उपाध्यक्ष सुनील वाधवा, सदस्य ममता गुप्ता, सदस्य शशि साहू, सदस्य प्रेम ढीगरा, संजय माहेश्वरी और सुनील आदि मौजूद रहे।

जब तक जनता की समस्याओं को दूर नहीं किया जाएगा और बढ़े कर का प्रस्ताव वापस नहीं होगा, सदस्यों का विरोध जारी रहेगा।
शिप्रा रस्तोगी, उपाध्यक्ष कैंट बोर्ड

टैक्स पर लिया गया निर्णय फाइनल नहीं है। आपत्ति मांगी गई है, जिसके बाद बोर्ड निर्णय करेगा। सदस्यों को मनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि बोर्ड में जनहित के कार्य हो सकें।
प्रशोतम लाल, सीईओ कैंट बोर्ड
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