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लुका-छिपी में बच्चा हो न जाए गलत आदत का शिकार

Meerut

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। ज्ञान का भंडार कहे जाने वाला इंटरनेट कहीं आपके बच्चों के लिए अभिशाप न बन जाए, इसपर सभी अभिभावकों को चौकस होने की जरूरत है। नीचे दिए जा रहे केस अभिभावकों के लिए सावधानी का संकेत हो सकते हैं।
केस एक : कक्षा चार का एक बच्चा इंटरनेट देखकर गलत आदतों का शिकार हो गया। पढ़ाई में उसकी परफार्मेंस कम हो गई। अभिभावक उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास ले गए। वहां पता चला कि घर में इंटरनेट पर बच्चे ने ऐसी साइट्स देखी थी जिससे वह गलत आदतों का शिकार हो गया।
केस दो : कक्षा दस के एक छात्र ने अपनी पॉकेटमनी से मल्टीमीडिया आईपॉड खरीदा। स्कूल में प्रार्थना के समय पीटी टीचर ने चेकिंग की तो उसकी जेब में आईपॉड निकला। तलाशी लेने पर उसकी जेब से एक चिप और उसमें अश्लील सामग्री मिली।
केस तीन : क्लास में कक्षा नौ के छात्र जीरो पीरियड में कंप्यूटर की जानकारी ले रहे थे। इस दौरान एक छात्र के पास बुक के बीच में अश्लील फोटो वाली बुक मिली। टीचर ने तुरंत प्रधानाचार्य और अभिभावक को इसकी सूचना दी।
स्कूलों में इस तरह के केस सामने आ रहे हैं। मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार इसका मुख्य कारण आधुनिकता की अंधी दौड़ और अभिभावकों का बच्चों से ध्यान हटना है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सम्यक जैन का कहना है कि कम उम्र में अधकचरी जानकारी होने के कारण बच्चों को कई तरह के मल्टी डिसऑर्डर होने की आशंका रहती है, जैसे एनजाइटी, कंडक्ट, जेंडर डिसऑर्डर आदि। इनमें बच्चों को घबराने, समाज के विपरीत कार्य करने और अपनी पहचान को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति होती है। इसके अलावा सबसे ज्यादा ओसीडी की समस्या होती है। यह भी एक खतरनाक डिसऑर्डर है। इसमें बच्चे के दिमाग में यदि कोई चीज घर कर गई तो वह जिंदगी भर निकलनी मुश्किल होती है। इससे वह गलत आदत उसको क्राइम की तरफ भी ले जा सकती है।
सावधानी
डॉ. सम्यक जैन के अनुसार इसका बेहतर उपाय है कि बच्चे की नियमित मॉनीटरिंग की जाएं है। अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, उम्र के हिसाब से उसे जानकारी देना, इंटरनेट एवं फोन इस्तेमाल करने के दौरान, दोस्तों के साथ उसका व्यवहार और खानपान पर नजर रखनी चाहिए।

कोट्स
ऐसे केस कई सामने आ रहे हैं। वह स्वयं दो-तीन केस ऐसे पकड़ते, जिसमें बच्चों के पास महंगे सेट और अश्लील सामग्री होती है। इस बारे में उनके अभिभावक को सूचित कर दिया जाता है।
- नवीन सिरोही, पीटी टीचर, जीआईसी
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