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हंगामे के बीच भूल गए जनता के मुद्दे

Meerut

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। विज्ञापन-होर्डिंग ठेके की नियमावली से अनुभव की शर्त को निकाल दिया गया। बोर्ड बैठक में विज्ञापन प्रभारी नरेश सिवालिया ने प्रस्ताव पढ़ते हुए विज्ञापन-होर्डिंग का ठेका हासिल करने के लिए तीन वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य बताया था। नगर आयुक्त राजकुमार सचान ने इस पर आपत्ति जताई।
प्रस्ताव पढ़े जाने के बाद कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पंकज कतीरा ने पहले तो विज्ञापन-होर्डिंग का ठेका हासिल करने के लिए इस क्षेत्र का अनुभव होने की वकालत की। लेकिन पार्षद गौरव ने इसका विरोध किया। इस दौरान डायस के दूसरी ओर बैठे कुछ लोगों और पार्षदों की आंखों ही आंखों में इशारेबाजी का दौर चला। इसके बाद पूरी स्थिति बदल गई। नगर आयुक्त ने भी कह दिया कि कार्य करने से ही अनुभव आता है। इसके लिए अनुभव की जरूरत नहीं है। बाद में अनुभव की शर्त को निकाल दिया गया। इस दौरान बिना नियमावली पिछले दिनों लगाए गए 31 यूनिपोल होर्डिंग के मसले पर नगर आयुक्त की भूमिका को भी संदेहास्पद मानते हुए तीखे सवाल दागे गए।
कमजोर साबित हुआ विपक्ष
बोर्ड बैठक में एक बार फिर विपक्ष कमजोर नजर आया। बैठक की शुरूआत से ही कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पंकज कतीरा और विजय आनंद अग्रवाल (भाजपा) ने चर्चा की कमान संभाल ली। जबकि विपक्ष का नेतृत्व करने का दावा करने वाले सर्व दलीय पार्षद दल के अध्यक्ष मो. शाहिद माइक पाने के लिए भी जद्दोजहद करते नजर आए। महिला पार्षदों में रश्मि तेवतिया, ज्योति वर्मा, पूजा वाल्मीकि ने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया।
जिलाधिकारी से कराएं वार्ता
शहर के लिए नासूर बनीं अवैध डेयरियों और सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं का मसला बोर्ड बैठक में भी गूंजा। पार्षद सुधीर पुंडीर, दीवान जी शरीफ आदि ने आरोप लगाया कि हर बार केवल प्रस्ताव ही पास कर दिए जाते हैं। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। उधर, महिला पार्षद द्वारा की गई टिप्पणी के बाद दो पार्षद ज्योति और पूजा वाल्मीकि ने भी कर्मचारियों की पैरवी की। दोनों ने साथी महिला पार्षद से माफी मांगने की मांग की।
दूरी बनाए रखी
सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में पूर्व पार्षद और महापौर के सलाहकार माने जाने वाले विपिन जिंदल सदन में मौजूद रहे। लेकिन स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक अजय गुप्ता ने इससे दूरी बनाए रखी। यह मसला चर्चा का विषय बना रहा।
बोलते ही टारगेट पर
बोर्ड बैठक में सच बोलते ही मुख्य नगर लेखा परीक्षक सभी के निशाने पर आ गए। बैठक शुरू होते ही विपक्ष का नेतृत्व कर रहे मो. शाहिद ने सीधा सवाल दागा कि क्या कार्यकारिणी में रखे बिना सीधे बोर्ड बैठक में बजट को रखा जा सकता है? इस पर अधिकारियों ने कहा, ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन यह रिवाइज्ड बजट है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक सच्चिदानंद त्रिपाठी से पूछने पर उन्होंने सीधा जवाब दिया कि उन्हें वर्ष 2012-13 मूल बजट की कॉपी आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। वित्त नियंत्रक से लेकर नगर आयुक्त तक को इससे अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद एक दर्जन से अधिक पार्षदों ने उन्हीं का घेराव कर लिया। नगर आयुक्त ने कहा कि एक अधिकारी द्वारा सदन में इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती।
कौन होगा स्वास्थ्य अधिकारी?
नगर निगम बोर्ड ने सोमवार को नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजवीर सिंह को रिलीव कर दिया। सदन ने सर्व सम्मति से महानगर की सफाई व्यवस्था पर रोष जताते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया। सदन द्वारा रिलीव किए जाने के बाद अब यह प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
हवाई हुआ ऐलान
वार्ड 71 से पार्षद के पति यासीन पहलवान द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों का मुंह काला करने की टिप्पणी से आक्रोशित उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के महामंत्री कैलाश चंदोला ने उनका मुंह काला करने का ऐलान किया था। सोमवार को उनका यह ऐलान हवाई साबित हुआ। कैलाश चंदोला के अलावा अधिकांश लोगों ने यासीन को सदन से लेकर टाउन हॉल परिसर में घूमते देखा। बोर्ड बैठक के बाद मलिन बस्ती विकास मोर्चा के अध्यक्ष शाहिद पहलवान और संयोजक यासीन पहलवान के नेतृत्व में दर्जनों समर्थकों ने जमकर नारेबाजी कर बदहाल सफाई व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाया।
नहीं हो सकी चर्चा
बैठक में कुल 64 पार्षद उपस्थित रहे। हंगामे और हाथापाई के चलते पार्षद निधि, नगर आयुक्त और महापौर निधि के कार्यों को अवस्थापना निधि से कराए जाने पर चर्चा नहीं हो सकी। इसके अलावा 74वें संविधान संशोधन विधेयक पर भी सदन में चर्चा नहीं कराई जा सकी।
चूकते रहे उप नगर आयुक्त
बोर्ड बैठक के संचालन का जिम्मा उप नगर आयुक्त वीरेंद्र शुक्ला को दिया गया था। लेकिन लंबे अनुभव के बावजूद वह बार-बार चूकते रहे। बिंदुवार प्रस्तावों को पढ़ने में वह नाकाम साबित हुए। बार-बार यह क्रम दोहराए जाने पर सदन में कई बार शेम-शेम के नारे गूंजे।
हुआ प्रजेंटेशन
एक निजी कंपनी से आए जितेंद्र सिंह और अतुल मल्होत्रा ने टैक्स वसूली व्यवस्था और कार्य को अंजाम देने की तकनीक में सुधार से जुड़ा अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। बोर्ड बैठक के बाद दिए गए इस प्रजेंटेशन में बताया गया कि कानपुर नगर निगम में भी इसे अपनाया जा रहा है।
राकांपा ने की नारेबाजी
बोर्ड बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए टाउन हॉल पहुंच गए। नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष अबरार अहमद ने बताया कि शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मलिन बस्तियों से जलकर वापस लेने, लिसाड़ी गांव में विकास कार्य कराने समेत पांच सूत्रीय मांग पत्र नगर निगम अधिकारियों को सौंपा गया। इस दौरान चौधरी मुकीम, हाजी यामीन, फहीमुद्दीन, मो. इकबाल, गुल मो. महमूद राणा, फैयाज अहमद सैफी, जमालुद्दीन, यासीन अलवी आदि शामिल रहे।
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