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ओ भगवान! तेरा लाख-लाख शुक्रिया

Meerut

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। ओ भगवान! तेरा लाख-लाख शुक्रिया। ये वो छह शब्द हैं, जो बेटे भुवनेश्वर कुमार (भुवी) के टीम इंडिया में चयन की सूचना पर उनके पिता किरणपाल सिंह के मुंह से निकले। खुशी के मारे मोबाइल फोन हाथ से छूटने लगा और आंखों से आंसू बहने लगे। कहा कि एक बेटे का अपने पिता केेेेेे लिए इससे अच्छा तोहफा और क्या हो सकता है।
गंगानगर स्थित भुवनेश्वर का निवास (जीपी-66) मिनटों में वीवीआईपी हो गया। सूचना मिलते ही मोहल्ले वाले और भुवी के दोस्त बधाई देने के लिए उनके घर की ओर दौड़ पड़े। पड़ोसी उदयवीर सिंह, भुवी के दोस्त विनीत, बसंत मलिक, रोहित चौधरी, सुनील मलिक और हिमांशु चिकारा का तो खुशी के मारे बुरा हाल था। इतने उत्साहित थे कि घर पहुंची मीडिया से भुवी के स्कूल से लेकर क्रिकेट के मैदान तक के सफर को बयां कर डाला।
भुवी के पिता किरणपाल सिंह यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में बागपत एसपी के पीआरओ हैं। किरणपाल सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्हें भुवी के इंडिया टीम में जाने की 50-50 उम्मीद थी। वो पिछले दो साल से टीम इंडिया का दरवाजा खटखटा रहा था। वर्तमान रणजी सत्र में भी भुवी का जबरदस्त प्रदर्शन चल रहा है।
मां साझा नहीं कर सकी खुशी
भुवी की मां इंद्रेश रिश्तेदार के यहां शादी में गईं हैं। बेटे के टीम में आने की खुशी को वो भुवी के पिता और मोहल्ले वालों के साथ साझा नहीं कर सकीं। किरणपाल ने सबसे पहले यह सूचना इंद्रेश को ही दी थी। बताया कि मां तो मां होती है। भुवी के टीम में चयन होने की सूचना पर उसके मुंह से शब्द ही नहीं निकले। काफी देर तक चुप रहने के बाद उसने कहा, वह अभी घर आ रही है।
डेढ़ साल की उम्र में मांगा था बैट
किरणपाल ने बताया कि कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई दे जाते हैं। भुवी जब डेढ़ साल का था, तो परिवार संग उसे लेकर नौचंदी मेला गए थे। वहां पर खिलौना दिलाने लगे, तो भुवी ने खिलौने की बजाय बैट की मांग की थी।
मां लगाती थी फटकार
पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट में ध्यान देने पर मां इंद्रेश भुवी को डांट देती थी। इसके बाद भुवी चुप हो जाता था और कहता था कि मां बस थोड़ी देर खेलकर आ जाऊंगा।
2005 में शुरू हुआ क्रिकेट का सफर
ट्रांसलेम एकेडमी से भुवी की स्कूलिंग हुई है। पहले वह स्कूल में क्रिकेट खेलता था। 2005 में भुवी ने विक्टोरिया पार्क क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण के लिए प्रवेश किया। दो साल के गहन प्रशिक्षण एवं मेहनत के बल पर वह यूपी की अंडर-16 टीम का सदस्य बन गया।
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