आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

भुगतान संकट में फंसा मिड-डे मील

Meerut

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। जनपद में मिड-डे मील योजना की महज खानापूर्ति हो रही है। भुगतान न होने के चलते कई स्कूलों में मिड-डे मील पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं होने के चलते बच्चे भी इससे परहेज कर रहे हैं।
सरकार प्राइमरी स्कूल में प्रति छात्र 3.11 रुपये, जबकि जूनियर और माध्यमिक विद्यालयों में प्रति छात्र 4.65 रुपये मिड-डे मील में खर्च करती है। पर, इन पैसों का समय से भुगतान नहीं होने से समस्या आ रही है। शैक्षिक सत्र 2012-13 में जुलाई से लेकर नवंबर तक का भुगतान नहीं हो पाया है। बहरामपुरखास के ग्रामप्रधान प्रो. देवेंद्र सिंह सिंधु का कहना है कि भुगतान में विलंब होने से सबसे ज्यादा दिक्कत रसोइयों की होती है। इन्हें एक हजार रुपये का मानदेय दिया जाता है। पर, अभी तक किसी के खाते में धनराशि नहीं पहुंची है। कई बार तो पैसों के अभाव में मिड-डे मील न बनने तक की नौबत आ जाती है। बताते चलें कि जनपद में 936 प्राइमरी स्कूल, 474 जूनियर स्कूल और 151 माध्यमिक स्कूलों में मिड-डे मील बनाया जाता है। शहरी क्षेत्र में भोजन बनाने का काम 10 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को दिया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इसका जिम्मा ग्रामप्रधान के पास है।

मिड-डे मील खाने से परहेज
बुधवार को शहर के केके इंटर कालेज, एसएसडी ब्वॉयज और प्राइमरी कन्या पाठशाला पूर्वामहावीर आदि में मिड-डे मील में खीर दिया गया, पर स्वादहीन होने के कारण बच्चों ने इसे नहीं खाया। एनजीओ ग्रामीण विकास सेवा संस्थान के सुपरवाइजर राजेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल की ओर से बिस्कुट, फल आदि की मांग की जाती है। पर, सरकार की ओर से इसकी अनुमति नहीं है। वहीं, डीएन इंटर कालेज में कई माह से मिड-डे-मील नहीं गया है। कालेज के प्रधानाचार्य हरिओम शर्मा के अनुसार बच्चे स्वादहीन होने के चलते मिड-डे-मील को पूरा नहीं खाते हैं। खाने की बर्बादी होती है। वहीं, प्राइमरी कन्या पाठशाला पूर्वा महावीर की हैड मास्टर नसरीन जमाल ने बताया कि मिड-डे मील में बिस्कुट, केले, सेब या मौसमी फल हो तो बेहतर है। उन्होंने बताया कि मैन्यू में रोटी-सब्जी और पूरी भी है, लेकिन इस तरह खाना नहीं आता है। बस, दाल-चावल, दलिया, खीर दिए जाते हैं।
वर्जन
मिड-डे मील का भुगतान किया जा रहा है। जिलाधिकारी का आदेश है कि मिड-डे मील बनाने या वितरण नहीं होने की शिकायत मिलने पर इसकी जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए। - जीवेंद्र सिंह ऐरी, बीएसए
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

Open Letter: हीरोइन का अपडेटेड वर्जन नाकाबिले बर्दाश्त क्यों?

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

'रामायण' बनाने वाले की पोती तस्वीरें वायरल

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

यह खिलाड़ी साबित हुआ भारत के लिए विभीषण

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

खुले में नहाती हैं सुष्मिता, सैफ को है बाथरूम से प्यार

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

ऑस्कर की 'कीमत' सिर्फ 10 अमेरिकी डॉलर

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

Most Read

ड‌िम्पल ने मोदी को बताया झूठ का प‌िटारा, कसाब को द‌‌िया नया फुलफॉर्म

dimple yadav rally in gonda
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

जानें, अखिलेश को मायावती से क्यों लग रहा है डर

akhilesh says against mayawati
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

पीएम मोदी के बयान से हिला पाकिस्तान, सर्जिकल स्ट्राइक-2 की तैयारी तो नहीं!

prime minister statement shock pakistan
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

EC ने समाजवादी एम्बुलेंस से ‘समाजवादी’ शब्द ढंकने को कहा

 up chief election office orders to cover  samajwadi word from samajwadi ambulance
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

अख‌िलेश जिसके साथ चलना पसंद नहीं करते, जनता उसे वोट क्यों दे: स्मृत‌ि ईरानी

smriti irani rally in amethi
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top