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सुविधाएं जमीनी भी नहीं, वसूली आसमानी

Meerut

Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
मेरठ। एनएच- 58 पर टोल वसूली को लेकर भड़का किसानों का गुस्सा यूं ही नहीं है। मानक के अनुसार जो सुविधाएं एनएच और टोल प्लाजा को उपलब्ध करानी हैं, वो आज तक यहां उपलब्ध नहीं कराई गईं। लेकिन टोल के दाम जरूर दूसरे एनएच से ज्यादा वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि किसानों को मुआवजा भी अभी नहीं मिला है।
टोल शुरू होने से अब तक सिवाया टोल प्लाजा पर रेट बढ़कर डेढ़ गुना तक पहुंच चुके हैं। बात सुविधाओं की करें तो टोल रोड पर दोनों तरफ जंगली जानवरों को रोकने के लिए कोई बेरिकेडिंग नहीं है। पुलिसिंग और एबुलेंस सुविधा भी नाकाफी है। सर्विस लेन, अंडर पास, नाला निर्माण और मुआवजे पर तो किसान कई बार आंदोलन कर चुके हैं।
हद तो यह है कि पूरा मार्ग न तो एकसमान चौड़ा है और न ही गड्ढामुक्त, जबकि यमुना एक्सप्रेस वे और एनएच- दो पर सुविधाएं यहां से ज्यादा हैं। यमुना एक्सप्रेस वे पर सुविधाएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हैं। एनएच-2 भी एनएच- 58 से कहीं आगे है। एनएच-2 करीब 160 किलोमीटर लंबा है। यहां दो जगह टोल प्लाजा है, जहां 80-80 रुपये वसूले जाते हैं। टोल रेट के हिसाब से जरूर दोनों में समानता है। मगर एनएच- 2 की सड़क जहां बेहतर है, वहीं पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा के साथ ही हर गांव और जनपद के बोर्ड मार्ग पर अंकित है। एनएच - 58 पर अभी भी 1200 किसानों का 33 करोड़ रुपये बकाया है।

क्या हैं कमियां
- सर्विस लेन नहीं बनी
- अंडर पास नहीं
- नाला निर्माण भी अधूरा
- रिफ्लेक्टर नहीं
- हाईवे पुलिसिंग की व्यवस्था नहीं
- साइड बैरियर नहीं, इससे दुर्घटना की आशंका ज्यादा
- एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
- जरूरी मोबाइल नंबरों के बोर्ड नहीं लगे
- डिवाइडर में कट होने से लगता है जाम
दो सरकारों के बीच में जनता क्यों पिसे?
मेरठ। टोल वसूली का मुद्दा विधानसभा में भी उठा। मेरठ कैंट से भाजपा विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि दो सरकारों के बीच जनता पिस रही है, जो कि गलत है। उन्होंने प्रदेश सरकार से शीघ्र ही ठोस कदम उठाने की मांग की। नियम 300 के तहत सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा है कि काम पूरे कराए बगैर ही अधिकारियों की मिलीभगत से सिवाया में टोल वसूली भी शुरू हो गई। दर भी अन्य नेशनल हाईवे के अनुपात में बहुत अधिक है। मुआवजा भी अभी नहीं दिया गया है। टोल प्लाजा भी गलत स्थान पर बना है। इसके बावजूद किसानों के चल रहे धरने पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है।
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