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सीरिंज के सौदागर गिरफ्तार

Meerut

Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
मेरठ। राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान की सीरिंजों की खेप के साथ पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी फरार है। पकड़े गए आरोपियों में तीन कबाड़ी हैं और एक मिनी ट्रक चालक है। सीरिंजों की कीमत करीब साढ़े सात लाख रुपये बताई जा रही है। मुख्य आरोपी गिरफ्त में नहीं आ सका है।
यह गिरफ्तारी ब्रह्मपुरी पुलिस ने की है। सीओ ब्रह्मपुरी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि भगवतपुरा मोहल्ले से मिनी ट्रक में भरी सीरिंजों को जब्त किया गया। चालक सलमान पुत्र जाफर निवासी कमालपुर थाना मेडिकल, मुनव्वर निवासी कमालपुर, जुगल किशोर निवासी होरामनगर ब्रह्मपुरी और चमन सिंह जाटव निवासी लक्ष्मणपुरी ब्रह्मपुरी को गिरफ्तार किया गया है। सीरिंजों पर ‘गवर्नमेंट सप्लाई, नोट फॉर सेल’ लिखा है। यह सीरिंज कोजक हिंदुस्तान सीरिंज एंड मेडिकल डिवाइस लि. बल्लभगढ़ फरीदाबाद से सप्लाई की हुई हैं। मछेरान निवासी कबाड़ी जाहिद इस मामले में मास्टरमाइंड है, उसे तलाश किया जा रहा है। जाहिद ने ही मेडिकल कॉलेज से सीरिंज निकलवाने का सौदा किया था। सौदा किससे हुआ, इसका पता जाहिद की गिरफ्तारी के बाद ही चल पाएगा। मिनी ट्रक में सीरिंजों के 700 कार्टन हैं, एक कार्टन में 200 सीरिंज हैं।
दिल्ली तक जुड़े तार
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान की सीरिंजों की खरीद-फरोख्त के तार दिल्ली तक जुड़े हैं। सीओ ब्रह्मपुरी ने बताया कि इससे पहले भी सीरिंज की खेप खरीदी गई, जिसमें से काफी मात्रा में दिल्ली के किसी कबाड़ी के यहां सप्लाई करा दी गई। बाकी तोड़कर प्लास्टिक कचरे के रूप में बेच दी गई। जाहिद की गिरफ्तारी के बाद मालूम चल पाएगा कि दिल्ली में सप्लाई किसे की गई।
दो लाख रुपये दिए थे एडवांस
आरोपी चमन सिंह ने पुलिस को बताया कि सीरिंज की खरीद के लिए उन्होंने दो लाख रुपये जाहिद को एडवांस दिए थे। बुधवार को तीन से चार बजे के बीच मिनी ट्रक को मेडिकल कॉलेज ले जाकर सीरिंजों की पेटियां भरवाई गई थीं। इसके बाद सीरिंज की एक और खेप मिलनी थी, मगर उससे पहले ही पुलिस ने दबोच लिया।
सीरिंज से सभी ने किया किनारा
एनआरएचएम के बाद सीरिंज घोटाले की बू, एडी ने बैठाई जांच, तीन मंडलों से मांगा रिकार्ड
मेरठ। बच्चों को टीका लगाने के लिए आई राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान की सीरिंज कबाड़ी तक कैसे पहुंची, इस पर अफसरों ने चुप्पी साध ली है। बाजार में पांच रुपये में बिकने वाली सीरिंज कबाड़ के भाव बेची गई और पूरा स्वास्थ्य महकमा शांत है। एडी, सीएमओ, सीएमएस अंदरखाने रिकार्ड दुरुस्त करने में जुटे हैं, मगर गर्दन बचाने के लिए सभी मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं।
एनआरएचएम में करोड़ों रुपये के बंदरबांट के बाद स्वास्थ्य विभाग में सीरिंज घोटाला सामने आया है। अपर निदेशक कार्यालय से ढुलाई के बाद सीरिंज कबाड़ी के यहां कैसे पहुंची, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि स्टोर कीपर अनिल कुमार और ड्राइवर के भाई प्रवीन के मुताबिक एडी कार्यालय से मंगलवार दोपहर डेढ़ लाख सीरिंज लोकल के लिए लोड हुईं थीं। सीरिंज कहां जानी थी, यह कोई नहीं बता रहा। मेरठ एडी कार्यालय से मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद तीन मंडलों के सभी जिलों को सरकारी सीरिंज सप्लाई होती है।
सीरिंज पकड़ी जाने से स्वास्थ्य महकमे में हड़बड़ी है। वहीं विभागीय विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं। सरकारी सीरिंज और वैक्सीन को बाजार में बेचने का खेल अंदरखाने बड़े पैमाने पर चल रहा है। मामले में आला अफसरों सहित कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है। स्टॉक बुक और इंडेंट की जांच के बाद ही पता चलेगा कि सीरिंज कहां जानी थी।

कहां हैं इन सवालों के जवाब
- कहां जानी थीं डेढ़ लाख सीरिंज, किसने की थी मांग
- मेरठ के लिए हुई ढुलाई, सीएमएस, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज सभी बोले हमने नहीं मंगाई
- सरकारी नहीं, तो क्या निजी अस्पताल जा रही थी सीरिंज
- लखनऊ से सप्लाई का आदेश था या नहीं

साढ़े सात लाख कीमत
मेरठ ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया टीकाकरण की वन एमएल की सीरिंज रिटेल में पांच रुपये में बिकती है। इस तरह डेढ़ लाख सीरिंज की कीमत साढ़े सात लाख है।

वर्जन
- सीरिंज कहां सप्लाई होनी थी, इसकी जांच शुरू हो गई है। दो एडी और एसीएमओ को जांच में लगाया है। साथ ही तीनों मंडलों के सभी सीएमओ से सीरिंज की डिमांड सप्लाई रिकार्ड और इंडेंट बुक तलब की गई हैं।
- डॉ. एके खरे, एडी हेल्थ

- सीरिंज हमारे यहां की नहीं है। तीन दिसंबर से खसरा टीकाकरण अभियान शुरू होगा, तभी सीरिंज डिमांड होगी। फिर भी रिकार्ड जांचने के लिए डीआईओ को आदेश दिया है।
- डॉ. अमीर सिंह, सीएमओ

- अस्पताल के लिए बाजार से सीरिंज खरीदी जा रही हैं। इसलिए ये हमारे यहां की नहीं हैं।
- डॉ. एएस राठौर, एसआईसी पीएल शर्मा अस्पताल

- सीरिंज सैंपल लखनऊ जांच को भेजे हैं। यह हिंदुस्तान सीरिंज गाजियाबाद की मैन्युफैक्चरिंग हैं। बैच नंबर का स्टॉक से मिलान करने के बाद ही पता चलेगा कि सीरिंज मेरठ की है या नहीं।
- संदीप कुमार औषधि निरीक्षक
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