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देश भर से आए जायरीनों का वलीदपुर में लगेगा जमघट

Mau

Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
मुहम्मदाबाद गोहना। महान सूफी संत मौलाना हजरत सूफी मुहम्मद जान साहब का 81वां उर्स 22 दिसंबर से तहसील क्षेत्र के वलीदपुर गांव स्थित मजार पर मनाया जाएगा। दो दिन तक चलने वाले इस उर्स में देश के कोने-कोने से हजारों जायरीन यहां पर मन्नतें मांगने आते हैं। साथ ही मन्नत पूरी होने की खुशी में सूफी साहब के मजार पर अकीदत के साथ चादर चढ़ाते हैं।
महान सूफी संत मौलाना हजरत सूफी मुहम्मद जान साहब के बारे में कहा जाता है कि इनके पूर्वज फारस देश के किरमान शहर से भारत में आए थे। कुल 18 सदस्यीय कुनबे के लोग बंगाल से बनारस और गाजीपुर से सिंगेरा गांव तथा मधुबन तहसील के नत्थूपुर में डेरा जमाए थे। इसी परिवार के एक सदस्य शेख अमानत अली के औलाद के रूप में सूफी साहब का जन्म वर्ष 1867 में सिंगेेरा गांव में हुआ था। सूफी साहब की प्रारंभिक शिक्षा इनके वालिद साहब की देखरेख में इनके घर पर ही हुई। बाद में यह उच्च शिक्षा के लिए सूफी साहब आजमगढ़, गाजीपुर व जौनपुर में भी तालीम हासिल करने के लिए गए। सुफियाना अंदाज होने के कारण सूफी साहब अक्सर यहां वहां जाया करते थे। 22 वर्ष की उम्र में वह मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के वलीदपुर गांव में पहुंचे उस समय यहां पर महान संत कामिल साहब का नाम व रुतबा था। सूफी साहब कामिल साहब के कारनामों व उनकी प्रसिद्घि को देखकर इनके मुरीद बन गए। साथ ही कामिल साहब को अपना उस्ताद मानकर यहीं रह गए। लगातार 22 वर्षों तक सूफी साहब अपने उस्ताद की सेवा करते रहे। सन 1904 मेें मौेेलाना कामिल साहब का इंतकाल होने के बाद सूफी साहब उनकी मजार बनवाकर बड़ी श्रद्घा से इनका उर्स मनाते रहे। बाद में सूफी साहब की चर्चा और इनके अच्छे कारनामों का गुणगान चारों तरफ होने लगा और देखते ही देखते सूफी साहब के मुरीदों की संख्या भी हजारों में हो गई। सूफी साहब का इंतकाल 65 वर्ष की उम्र में सन 1932 में वलीदपुर में हो गया। तबसे लेकर आज तक उनके मुरीदों द्वारा इनके रौजे पर प्रतिवर्ष मनाते हैं। उर्स में महाराष्ट्र, बंगाल, दिल्ली, गुजरात, बिहार, मध्यप्रदेश आदि प्रांतों से जायरीन आकर मन्नते मांगते हैं। इस संबंध में मजार के सज्जादानशी शाह मोहम्मद इजहार अहमद मोइनी ने कहा कि 22 दिसंबर को यहां पर जायरीनों का आना शुरू हो जाएगा। 24 दिसंबर तक उर्स चलेगा। जायरीनोें के खाने पीने व ठहरने की समुचित व्यवस्था की जा रही है।
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