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अभी तक नहीं बन पाए परीक्षा केंद्र

Mau

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
मऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित बोर्ड परीक्षाओं का फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन परीक्षा केंद्रों का निर्धारण अब तक नहीं हो सका है। निर्धारण में शुचिता बनाए रखने के लिए डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठकें कागज पर ही चल रही है। ऐसे में नकल माफिया अभी से अपनी गोटी फिट करने में जुट गए हैं।
जिले में 375 से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले पांच लाख से अधिक परीक्षार्थी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में सम्मिलित होंगे। बोर्ड की परीक्षाओं के शुरू होने में 100 दिन से कम ही रह गए हैं। लेकिन अभी तक परीक्षा केंद्रों की जांच का काम ही चल रहा है। हर वर्ष बोर्ड परीक्षा की शुचिता बनाने के नाम पर केंद्रों का निरीक्षण, परीक्षण और इधर उधर किया जाना जारी रहता है। नए जिला विद्यालय निरीक्षक की नई व्यवस्था के बीच केंद्र निर्धारण का काम अपने अंतिम चरण में है। विभागीय नियमों को देखा जाए तो परीक्षा केंद्रों के निरीक्षण के लिए जिले स्तर पर बकायदा एक समिति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होती है। इसमें जिला विद्यालय निरीक्षक, संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित कुछ विद्यालयों के प्रधानाचार्य सदस्य शामिल हैं। समिति के सदस्यों को बाकायदा बैठक कर परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की समीक्षा, मानक, शुचिता और पुराने इतिहास को देखकर करनी होती है। किंतु जानकारों की मानें तो वास्तविकता कुछ और ही होती है। जांच का बिंदु अलग और केंद्र निर्धारण की शर्त अलग होती है। तभी तो हर वर्ष मानकों को पूरा न करने वाले परीक्षा केंद्र बन जाते हैं और दागियों के दाग धुल जाते हैं। समय की कमी के कारण जिले में केंद्र निर्धारण की समिति की बैठकें केवल कागजों तक ही सीमित हैं। शिक्षक नेताओं की मानें तो जिला विद्यालय निरीक्षक अपने हिसाब से प्रधानाचार्यों को समिति में नामित करते हैं। अधिकतर समिति के सदस्यों को अभी केंद्र निर्धारण की स्थिति का ही पता नहीं है। एक सदस्य का तो यहां तक कहना था कि हमें बस अपने केंद्र से मतलब है। ऐसी स्थिति में यह भी निश्चित है कि केंद्र बनने के बाद आपत्तियां भी खूब आएंगी। जिन्हें दूर करने के लिए विभाग को और अधिक समय चाहिए। लिहाजा समय से परीक्षा समय से कराने के लिए बोर्ड के अनुरूप कार्य करना विभाग के लिए कठिन साबित हो सकता है।
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