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जिला महिला अस्पताल बदहाली का शिकार

Mau

Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
मऊ। नगर क्षेत्र के बालनिकेतन स्थित जिला महिला अस्पताल में वर्तमान समय में बदहाली ही बदहाली नजर आती है। पांच महिला चिकित्सकों समेत 21 लोगों का स्टाफ यहां मौजूद है। फिर भी आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में जहां दवाइयां नाममात्र ही मौजूद हैं। वहीं जांच के नाम पर तो कोई व्यवस्था ही नही है। ऐसे में आम आदमी के बीच आकर अस्पताल बनवाने की सुर्खियां बटोरने वाले जनप्रतिनिधि भी अब इसकी सुधि लेने मेें अपनी तौहीन ही समझाते हैं।
बालनिकेतन स्थित जिला महिला अस्पताल का उद्घाटन 28 जनवरी 2011 को हुआ था। इसके बाद मुख्य जिला अस्पताल से यहां पर महिला अस्पताल को स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद से ही यहां पर दुर्व्यव्यवस्थाएं जन्म लेने लगीं। अस्पताल में जहां दवा वितरण कक्ष की कोई व्यवस्था न होने पर सीढ़ी के नीचे किसी तरह से दवा वितरण का कार्य हो रहा है। वही दवाओें के नाम पर अस्पताल में सिर्फ आयरन, कैल्सियम और पैरासिटामाल के टैबलेट ही मौजूद हैं। खैर दवा के नाम पर तो कुछ है भी मगर मरीज के जांच के नाम पर तो कोई व्यवस्था नही है, जबकि किसी गर्भवती महिला के प्रसव से पहले उसकी विभिन्न प्रकार की जांच की जाती है। अस्पताल में बदहाली का आलम यह है कि महिलाओं को वार्ड में बिना पंखे के बीच अंधेरे में अपने बच्चाें के साथ रहना पड़ता है। अस्पताल परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी खराब पड़ा हुआ है। सोमवार को जब अस्पताल का जायजा लिया गया तो अस्पताल में महिलाएं बिना पंखे के अपने बच्चों के साथ नजर आई साथ ही चिकित्सक भी नदारत दिखी। महिला सीएमएस के कक्ष पर भी ताला लगा हुआ दिखा। ऐसे में यह साफ तौर पर दिखता है कि 21 लोगों के स्टाफ के बाद भी अस्पताल बदहाली के पथ पर तेजी से अग्रसर है। फिर सरकार द्वारा आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए चलाई जा रही इस योजना की बदहाली का जिम्मेदार कौन है यह तो जांच होने के बाद ही प्रकाश में आएगा।
इनसेट
ओटी के अभाव में नही होता आपरेशन
मऊ। जिला महिला अस्पताल में वर्तमान समय में सिर्फ सामान्य प्रसव ही होता है। ओटी के अभाव में यहां महिलाओं का आपरेशन द्वारा बच्चे को पैदा नहीं कराया जाता है। जबकि यहां पर पांच महिला चिकित्सकों की नियुक्ति है।
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अस्पताल से सीरिंज और हैंड ग्लब्स है नदारद
मऊ। जिला महिला अस्पताल में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाले सीरिंज और हैंड ग्लब्स भी अब नदारद हैं। प्रसव के दौरान इनका उपयोग सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में इनकी व्यवस्था नही होने पर प्रसव में बाधा भी पड़ सकती है।
इनसेट
क्या कहती हैं महिला सीएमएस
मऊ। जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक किरन कला ने बताया कि अस्पताल में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। वहां से निर्देश और बजट आते ही तमाम सुविधाएं अस्पताल में हो जाएंगी।
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