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षड्यंत्रकारी गिरफ्तार, लुटेरे अब तक फरार

Mau

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
मऊ। शहर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा में सर्राफ पुत्र को गोली मारकर लूटने की घटना का शनिवार को एसपी ने खुलासा किया। घटना से जुड़े पांच षड्यंत्रकारियों को कोतवाली परिसर में मीडिया के सामने प्रस्तुत करते हुए एसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि, वारदात को अंजाम देने वाले तीन लुटेरे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। लूट में प्रयुक्त पल्सर और लुटेरों की बोलेरो भी बरामद कर ली गई।
शहर कोतवाली क्षेत्र के आजमगढ़ तिराहा के समीप मुंशीपुरा निवासी राजेश वर्मा की स्वर्ण आभूषण की दुकान है। बीते मंगलवार की रात उनका पुत्र रीतेश दुकान बंद कर नगदी और जेवरात लेकर घर जा रहा था। घर से थोड़ा पहले ही बदमाशों ने गोली मारकर उससे नगदी और जेवर लूट लिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद तफ्तीश शुरू कर दी। सूचना के मुताबिक बिहार के सीवान जिला अंतर्गत गुठनी निवासी अरूण कुमार वर्मा पुत्र हंसनाथ प्रसाद की सारहू पुलिस चौकी के पास सोने-चांदी की दुकान थी। जो वर्तमान में बंद है। दक्षिणटोला थाना क्षेत्र के भरहू का पुरा मुहल्ला निवासी मोहन वर्मा पुत्र दसमी प्रसाद की भी आभूषण की दुकान पहले अरूण की दुकान के पास ही थी। दुकान कम चलने और ज्यादा पैसा कमाने की लालच में दोनों बदमाशों के संपर्क में आ गए। बदमाशों द्वारा लूटे गए आभूषणों को बेचने के साथ ही दोनों उनके लिए मुखबिरी और लूट की योजना भी बनाने लगे। कुछ बड़ा कमाने की योजना में अरूण और मोहन ने गोरखपुर जनपद के शातिर किस्म के अपराधियों से संपर्क किया। मोहन की दुकान में बुलाकर करीब पंद्रह दिन पहले राजेश वर्मा और रीतेश के आवागमन के तौर तरीकों की रेकी कराई। वारदात को सफलता के साथ अंजाम दिया जा सके इसके लिए अरूण ने रानीपुर थाना क्षेत्र के पलिया निवासी अनिल सिंह को आश्रयदाता के तौर पर और अपने गांव के ही उमेश वर्मा और सुभाष पटेल को सहयोगी के रूप में शामिल कर लिया। 25 सितंबर की शाम वारदात को अंजाम देकर गोरखपुर से आए तीनों पल्सर से भागकर अनिल के पलिया स्थित घर पहुंचे। अरूण वहां उमेश वर्मा और सुभाष पटेल के साथ बोलेरो लेकर आया। जहां से तीनों बदमाश उमेश और सुभाष के साथ लूट का माल लेकर गोरखपुर भाग गए। अरूण वापस शहर लौट आया। 28 को मुखबिर की सूचना और सर्विलांस के आधार पर अरूण वर्मा व अनिल सिंह को नगर के बलिया मोड़ से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों की निशानदेही पर गोरखपुर से उमेश वर्मा और सुभाष पटेल को भी बोलेरो समेत गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसओजी लगी है। जल्द ही वे भी गिरफ्त में होंगे। बदमाशों की गिरफ्तारी में एसओजी प्रभारी, सर्विलांस प्रभारी, थानाध्यक्ष रानीपुर और थानाध्यक्ष दोहरीघाट और मोहनलाल वर्मा की टीम ने सफलता पाई है।

धरने का अगुआ ही निकला लूट का सूत्रधार
मऊ। रीतेश को गोली मार कर लूटे जाने के बाद आक्रोशित लोगों की भीड़ ने आजमगढ़ तिराहे पर आक्रोशित लोगों की भीड़ ने जाम लगा दिया था। इसमें अगुआ के तौर पर मोहन वर्मा ही सबके सामने था।

अरूण वर्मा की गिरफ्तारी से सकते में आए लोग
मऊ। लूट कांड के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अरूण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी से नगर के सराफा मंडल से जुड़े लोग सकते में हैं। अरूण नगर के शीर्ष भाजपा नेता का साला भी है। व्यापारियों ने जब उसे कोतवाली परिसर में देखा तो आपस में यह कहते सुने गए कि जब अपना ही आदमी बदमाशों की मुखबिरी करने लगा तो पुलिस कहां तक सुरक्षा करती फिरेगी।

अपराधियों से जेवर की हो रही खरीद
मऊ। लूट की घटना से यह साफ हो गया है कि विभिन्न जनपदों में अपराधियों द्वारा लूटे गए जेवरात मऊ के बाजार में आसानी से खप जाते हैं। तभी तो गोरखपुर से आकर अपराधी लूटे गए सोने-चांदी के जेवर मोहन को बेंच जाते थे। परिणाम यह हुआ कि मोहन वर्मा और अरूण वर्मा दोनों अपराधियों से ही जेवर खरीदते-खरीदते खुद भी लूट की योजना बनाने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में शामिल हो गए। साथ ही दोनों ने मिलकर व्यापारियों की आय और उनकी गतिविधियों को भी बदमाशों से बताना शुरू कर दिया। ऐसे हालात में अब यह जिले के व्यापारियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे लोगों को चिह्नित करके पुलिस के बारे में उन्हें बताएं।

कितना लूटा गया नहीं पता चला
मऊ। सर्राफ पुत्र के साथ हुई लूट की घटना में कितनी नगदी और कितने के जेवर लूटे गए। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सका है। प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस भी अनुमान ही बताती दिखी। उधर, पकड़े गए बदमाश भी कितना लूटा गया इससे अनभिज्ञ ही दिखे। वहीं पकड़े गए बदमाशों से पता चला कि 22 सितंबर को ही वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन समय पर एक-दूसरे का फोन न मिल पाने के कारण प्लान निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद मंगलवार को वारदात को अंजाम दिया गया।
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