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उपेक्षित है भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली

Mau

Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
दोहरीघाट। जिला मुख्यालय से 40 किमी उत्तर वाराणसी-गोरखपुर नेशनल हाइवे पर स्थित गोंठा में भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। पर्यटन विभाग के उपेक्षा के चलते यह स्थली अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच गई है। लोगों ने संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को अवगत कराया बावजूद सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठायी जा सकी है।
गोठा स्थित भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली आज भी लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते गंतव्य तक पहुंचने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यहां पर पीपल का विशालकाय वृक्ष ही उनके यादों को समेटे है। भगवान बुद्ध के भाई नंद यहीं पर शिष्य बने थे। आज भी यहां एक छोटे से मंदिर में श्रद्धालु गाय का दूध चढ़ाते हैं। मंदिर में नंद की मूर्ति स्थापित है। इसलिए इस मंदिर को नंद बाबा का मंदिर कहा जाता है। भगवान बुद्ध बिहार में सिद्धि प्राप्त करने करने के बाद पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उपदेश देने के लिए निकले। जिले के दोहरीघाट क्षेत्र के गोठा गांव में एक टीले पर पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर प्रमुख शिष्यों को उपदेश दिया था। इसी स्थान पर बौद्ध भिक्षु, चिंतन और गोष्ठी किया करते थे। गोष्ठी केंद्र होने के कारण कालांतर में यह गोष्ठा अथवा गोठा बन गया। जिस नंद बाबा की चर्चा आज भी यहां होती है वह आयुष्मान गौतम बुद्ध के भाई और उनकी सगी मौसी के लड़के थे। राजा शुद्धोधन की एक रानी महामाया से सिद्धार्थ और इनकी दूसरी रानी प्रजापति से पुत्री नंदा और पुत्र नंद थे। यही नंद भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्य हुए। तथागत के 84 हजार उपदेश उन्हें पूरी तरह से कंठस्थ थे। यह ऐतिहासिक स्थल प्रमुख बौद्ध केंद्र बन गया। यह ऐतिहासिक स्थल प्रमुख बौद्ध केंद्र बौद्ध गया और कपिलवस्तु के बीच स्थित है। यहां के एक छोटे से मंदिर में एक लाट पर बोधिसत्व के रूप में गौतम बुद्ध की मूर्ति स्थापित है जो लगभग दो हजार वर्ष पूर्व बतायी जाती है। इस संबंध में झारखंडे राय, ग्राम प्रधान रामजनम गुप्ता, विजेंद्र राय ने कहा कि भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली होने के बावजूद इस स्थल को विकसित नहीं किया जा सका है। उन्होंने उपदेश स्थली को पर्यटन केंद्र का दर्जा देकर सुंदरीकरण कराए जाने की मांग की है।
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