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बाढ को लेकर बढ़ने लगी देवारावासियों की धड़कनें

Mau

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मधुबन। घाघरा के जलस्तर में जैसे-जैसे वृद्धि हो रही है वैसे-वैसे देवारावासियों की धड़कनें बढ़ती जा रही है। सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई है। चक्कीमूसाडोही का संपर्क अन्य गांवों व शहरों से संपर्क टूट जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से अभी तक नावों की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। वहीं कटान समस्या से निजात दिलाने के लिए महकमे की ओर से कार्ययोजना तक नहीं बन सकी है।
क्षेत्र के धर्मपुर, टाड़ी, बिंदटोलिया,धुस, बैरकंटा, खैरा, चक्कीमूसाडोही, विशुनपुर, सूरजपुर, मोर्चा, मोलनापुर, गजियापुर, कुंवरपुरवा,सिसवां, बखरिया, नूरूल्लाहपुर, कचिला, नरायनपुर, सुग्गीचौरी सहित दर्जनों गांवों में घाघरा प्रतिवर्ष तबाही मचाती है। घाघरा का जलस्तर 36 घंटे में पांच सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा है। बुधवार को नदी का जलस्तर 65.48 मीटर रहा। गुरुवार को पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि हाहानाला पर खतरे का निशान 66.31 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से चक्कीमूसाडोही का संपर्क अन्य रास्तों, गांवों, शहरों से टूट चुका है। गांव के चारों तरफ घाघरा के बाढ़ का पानी भर गया है। लेकिन प्रशासन की ओर से नावों की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। अपनी जान को जोखिम में डालकर लोग नदी पार रहे हैं। सबसे परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार नदी का जलस्तर बढ़ा तो व्यापक पैमाने पर नुकसान हो सकता है। घाघरा के बढ़ते जलस्तर से कुंवरपुरवा, गजियापुर, मोलनापुर, धर्मपुर, दुबारी सहित तटवर्ती के निचले इलाकों में जलजमाव होने से फसलें ज्वार, बाजरा, मक्का और धान डूब गई हैं। वहीं विभिन्न गांवों के विद्यालयों के परिसर में पानी भर जाने से पठन पाठन मेें व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

विस्थापितों की जिंदगी जीने को विवश हैं सैकड़ों लोग
दुबारी। घाघरा ने एक दशक से तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नदी की कटान ने बिंदटोलिया की बिंद बस्ती, पचपंडवा, मूसाडोही जैसी सैकड़ों परिवारों की बस्ती नदी में विलीन हो गई है। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से कटान पीडि़तों की सुधि नहीं ली जा सकी है। आज भी सैकड़ों लोग विस्थापितों की तरह जिंदगी जीने को विवश हैं।

हजारों एकड़ फसल जलमग्न
दुबारी। घाघरा का जलस्तर बढ़ने से बिंदटोलिया, जरलहवा, भगत का पुरा, मनमन का पुरवा सहित विभिन्न निचले इलाकों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। अब तक नदी में आठ हजार एकड़ भूमि समा चुकी है। परिषदीय विद्यालयों के परिसर में जलजमाव होने से पठन पाठन मेें व्यवधान पड़ रहा है। वहीं पब्बर का पुरवा, खैरा गांव सहित दर्जनों संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। इससे आवागमन बाधित हो गया है। लोगों को पशुओं का चारा लाने के लिए पानी से होकर जाना पड़ रहा है।

सिकड़ीकोल बंधा बनने से बच सकती है हजारों एकड़ फसल
मधुबन। क्षेत्र के सरफोरा से सिकड़ीकोल होते हुए परसिया तक बंधा न होने से लगभग सात किमी दूरी घाघरा के लिए मुफीद साबित होती है। घाघरा में जैसे ही बाढ़ आती है। इसी गैप के जरिए उसका पानी धर्मपुर, बखरिया, सिसवा, सुग्गीचौरी के अलावा नुरुल्लाहपुर, सिकड़ीकोल, सरफोरा आदि गांवों में फैलता है। अगर इस बंधे का निर्माण करा दिया जाए तो दर्जनों गांवों के लोगों के आशियाने के नष्ट होने तथा हजारों एकड़ फसल को डूबने से बचाया जा सकता है।

कई वर्षाें से नहीं हो रहा जर्जर बंधे पर मरम्मत कार्य
मधुबन। घाघरा की तबाही से बचाने के लिए सूरजपुर से लेकर सिकड़ीकोल, भैरोपुर, सुग्गीचौरी,मोलनापुर होते हुए हाहानाला तक बंधा दशकों पूर्व बनाया गया है। बंधा जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। जंगली जानवरों द्वारा सुरंग बना दिया गया है। ग्रामीणों की मानें तो महकमेे की ओर से जर्जर बंधों पर मरम्मत कार्य ही नहीं कराते देखा गया है। नदी के पानी का दबाव बढ़ने से बंधा टूट सकता है। सतीश
तटबंध बनने से रुक सकता है घाघरा का तांडव
मधुबन। घाघरा में प्रतिवर्ष बाढ़ आने से देवारावासियों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। नदी के तांडव से बचाने के लिए सूरजपुर से होते हुए सरफोरा, नुरुल्लाहपुर तथा देवरिया जनपद के परसिया विशुनपुर बंधे से मिलाने की मांग जोर पकड़ रही है। इसके अलावा परसिया धर्मपुर से दुबारी बंधे को जोड़ देने पर बाढ़ पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये बचेगा। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त बजट से देवारा में खुशहाली वापस आ सकती है।

देवारावासी बोले-दिया जाए आर्थिक पैकेज
मधुबन। देवारा में प्रतिवर्ष घाघरा की बाढ़ से व्यापक पैमाने पर नुकसान होता है। शासन प्रशासन की ओर से अभी तक कार्ययोजना न बनाए जाने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। समस्याओं का समाधान न होने पर लोगों ने आंदोलन करने का अल्टीमेटम दिया है।
घाघरा ने प्रतिवर्ष तबाही मचाकर देवारावासियों को हिलाकर रख दिया है। इसके बावजूद शासन प्रशासन द्वारा उपेक्षित किए जाने से लोग उद्वेलित हैं। इस संबंध में धर्मपुर के प्रधान विंध्यायल यादव, दुबारी के पूर्व प्रधान सुनैना सिंह ने कहा कि प्रतिवर्ष व्यापक पैमाने पर नुकसान होने से देवारावासियों की हालत दिन ब दिन स्थिति बदतर होती जा रही है। अब तक हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। साथ ही करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो चुकी है। इसके बाद भी शासन प्रशासन की ओर से ठोस कदम तक नहीं उठाया जा सका है। उन्होंने देवारा क्षेत्र को पैकेज दिया जाए। इसी तरह रामायन यादव, सुशील पांडेय, मृत्युंजय शुक्ला, ओमप्रकाश लीडर ने कहा कि बाढ़ आने पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा क्षति का जायजा तो लिया जाता है, लेकिन पीडि़तों को कागज पर ही लाभ दिलाया जाता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान खोजने से ही क्षेत्र का विकास संभव है।
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