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घाघरा नदी के लाल निशान छूते ही हड़कंप

Mau

Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
दोहरीघाट। घाघरा नदी के लाल निशान छूते ही तटवर्ती इलाकों के लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। वहीं नगर में अफरातफरी का माहौल हो गया है। नदी की प्रलयंकारी लहरें मुक्तिधाम और भारतमाता मंदिर पर टक्कर मार रही है। कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। नई बाजार गांव के सरहरा पुरवे में कई लोगों की बांस की खूंटी नदी में विलीन हो गई। आधा दर्जन घर कटान की जद में आ गए हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से कटान रोकने की दिशा में कदम नहीं उठाया जा सका है।
घाघरा के उग्र होने से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। नदी कहर बरपाने को बेताब नजर आ रही है। कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। रविवार को नई बाजार के सरहरा पुरवा में नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पुरवे के लालचंद, नंदू, चंद्रिका, बालचंद सहित एक दर्जन बांस की खूंटियां तथा पेड़ नदी में विलीन हो गए। चार घरों के पास नदी पहुंच गई है। इसी तरह नदी धनौली रामपुर गांव स्थित पावरग्रिड के सामने, ब्रह्मचारी बाबा की कुटी के पास, नागा बाबा की कुटी के पास, रसूलपुर आश्रम के आश्रम के पास नदी तेजी से कटान कर रही है। धनौली रामपुर के साथ रामजानकी मंदिर तथा श्रीनाथ बाबा मंदिर, आश्रम के पास श्रवण कुमार के अंधे माता पिता के मंदिर के पास कटान तेज हो गई है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर 69.75 मीटर रहा। रविवार को 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है। नदी के रौद्र रूप धारण कर लेने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम का अस्तित्व खतरे मेें दिख रहा है। वहीं नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, सूरजपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर सहित दर्जनों गांवों मेें बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।

टापू में तब्दील हुआ चक्कीमूसाडोही गांव
मधुबन। दोहरीघाट में घाघरा के लाल निशान छूने से तटवर्ती इलाके के लोगों के पेशानी पर बल पड़ना शुरू हो गया है। वहीं चक्कीमूसाडोही नदी के दोनों पाटों से घिरने के बाद भी टापू सा नजर आने लगा है। अब धीरे-धीरे नालों में भी पानी चढ़ने लगा है।
तहसील मधुबन का अधिकांश हिस्सा प्रत्येक वर्ष घाघरा नदी में आई बाढ़ की चपेट में आ जाता है। सूरजपुर से लेकर परसिया जयरामगिरी के बीच मोर्चा आश्रम, सिकड़ीकोल, नुरुल्लाहपुर, कचिला, बखरिया, सुग्गीचौरी, सिसवा, धर्मपुर बिंदटोलिया, खैरा, धर्मपुर टांड़ी, दुबारी, कुंवरपुरवा, गजियापुर, मोलनापुर से लेकर परसिया तक दर्जनों गांव व पुरवे बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। लेकिन सिंचाई विभाग व प्रशासन की ओर से घाघरा के तांडव से बचाने का प्रयास तक नहीं किया जाता। घाघरा नदी में पानी हालांकि हाहा नाला पर खतरे के निशान से काफी नीचे है लेकिन देवारावासियों की धड़कनें तेज है। उधर चक्कीमूसाडोही गांव के दोनों तरफ नदी के भर जाने से गांव टापू जैसा लग रहा है। गांववासी नावों के माध्यम से बरहज या तेलिया कला आ जा रहे हैं। इस बाबत तहसीलदार पीपी उपाध्याय ने बताया कि बाढ़ के लिए सुग्गीचौरी, दुबारी, परसिया आदि में कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। जरूरत पड़ने पर सभी आवश्यक चीजें उपलब्ध करा दी जाएगा। अभी स्थिति खतरे से बाहर है।

ग्रामीण बोले, कटान समस्या से दिलाएं निजात
दोहरीघाट। दशकों बाद भी कटान समस्या का समाधान न ढूंढे जाने से नई बाजार गांव के लोगों में आक्रोश पनप रहा है। नई बाजार के सरहरा पुरवा को घाघरा लीलने के लिए आतुर दिख रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से बोल्डर गिराने की जहमत तक नहीं उठायी जा सकी है। कटान जारी रहने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की नींद टूटने का नाम ही नहीं ले रही है। इस संबंध में रामकरन यादव, मंडल यादव का कहना था कि अब तक सैकड़ों एकड़ उपजाऊं जमीन नदी में विलीन हो गई। कटान से गांव का प्रसिद्ध मंदिर खतरे में है। प्रशासनिक अधिकारियों को बरसात पूर्व ही ज्ञापन सौंपा गया लेकिन जानबूझकर मामले को दबा दिया जा रहा है। इसी क्रम में हन्नु यादव, बिट्टु मद्धेशिया ने कहा कि गांव में ठोकर निर्माण मानक के अनुरूप नही कराया गया है। यही वजह है कि कटान फिर शुरू हो गई है। नदी लगातार सरहरा पुरवे की तरफ कटान कर रही है। बावजूद सिंचाई खंड तथा प्रशासन की ओर से कटान रोकने का प्रयास तक नहीं किया जा रहा है। इसी तरह बढ़न यादव व शिवशंकर ने कहा कि बाढ़ से व्यापक पैमाने पर तबाही होती है। फसलें डूब जाती है। कागज में ही कटान पीडि़तों को राहत दिलाया जाता है, लेकिन हम लोगों को एक पाई नसीब नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि कटान समस्या से निजात नहीं दिलाई गई तो हम लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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