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कच्छप गति होकर रह गई है स्वजल धारा योजना

Mau

Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
मऊ। जिला स्वच्छता पेयजल मिशन योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में लोगों को पाइप लाइन से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए बनी स्वजल धारा योजना अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों को पाइप लाइन से शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का सपना अभी कोसों दूर है। जिले में पांच साल में इस योजना के तहत महज नौ स्थानों पर ही इसकी यूनिट स्थापित होने की स्वीकृत मिली। इनमें भी छह गांवों में ही जैसे तैसे यह योजना संचाहित है। कहिनौर में जहां एक यूनिट पांच साल में नहीं चालू हो पाई वहीं नए वित्तीय वर्ष में बजट के बाद भी दो पर कार्य नहीं हो पाया।
जिले की 598 ग्राम पंचायतों में शुद्ध पेयजल का संकट अभी भी दूर नहीं हो पाया है। इंडिया मार्का हैंडपंप की भी उपलब्धता गांवों में अपर्याप्त है। शासन से ग्रामीण अंचलों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराए जाने के लिए स्वजल धारा नाम से योजना का संचालन होता है। इस योजना के तहत 90 प्रतिशत धनराशि सरकार खुद वहन करती है शेष 10 प्रतिशत धनराशि गांव के लाभार्थियों को वहन करनी पड़ती है। इस योजना के तहत 15 हजार लीटर से लेकर 50 हजार लीटर या इससे भी बड़ी क्षमता की पानी की टंकी स्थापित कर नलकूप से पाइप लाइन के माध्यम से ग्रामीणों को पेयजल की आपूर्ति की जानी है। वर्ष 2006-07 में इस योजना के तहत परदहां ब्लाक के रणवीरपुर, कहिनौर, कुशमौर, सलाहाबाद और रैनी के लोगों ने दस प्रतिशत का अंशदान देकर 15 हजार लीटर की टंकी एवं नलकूप आदि स्थापित कराने में रुचि दिखाई। इनमें कुछ स्थानों पर तो पेयजल की आपूर्ति हो रही है लेकिन कहिनौर में अभी टंकी का ही कार्य पूरा नहीं हो पाया है। वर्ष 2008-09 में सरवां एवं इटौरा में भी यूनिट की स्थापना हुई है। पांच साल से भी अधिक समय से संचालित इस योजना को ग्रामीण अंचलों के कोने-कोने में स्थापित कर पाइप लाइन से पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराना था। लेकिन यह योजना धीमी गति का शिकार होने के चलते अपने उद्देश्यों पर खरा नहीं उतर पा रही है। इस संबंध में विभाग का कहना है कि योजना के विस्तार का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इसके लिए आवेदन करें और वहां यूनिट स्थापित कराई जा सके। जहां कार्य पूर्ण हैं वहां लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।


ग्रामीण और विभाग दोनों नहीं ले रहे रुचि
मऊ। ग्रामीण अंचलों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनी इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रति ग्रामीण और विभाग दोनों ही रुचि नहीं ले रहे हैं। इस योजना में स्थापित यूनिटों की देखरेख से लेकर सभी कार्य ग्रामीणों के सहयोग से होने हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर हालांकि मानदेय पर एक आपरेटर रखा जाना है जो इसकी देखरेख करेगा। लेकिन संचालित होने के बाद यूनिटों की देखरेख में सरकारी कर्मचारी का दायित्व या उनकी जवाबदेही अभी तक न तय होने के चलते इसके भविष्य को लेकर लोग कतरा रहे हैं।


नए वित्तीय वर्ष में दो स्थानों पर हो रहा कार्य
मऊ। डीआरडीए की सूचना के अनुसार वर्ष 2012-13 के लिए दो गांवों का चयन हुआ है। इसके तहत लखनौर 50 हजार लीटर एवं वनपोखरा में एक लाख लीटर की पानी की टंकी एवं नलकूप लगाकर पाइप लगाने की योजना है। यहां भी कार्य अभी धीमी ही गति से संचालित है। यहां अभी सिर्फ बोरिंग ही हो पाई है। दोनों प्रोजक्ट पर 34 लाख से अधिक की धनराशि खर्च की जानी है।
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