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घास-फूस और कचरे से चलेगा जनरेटर

Mau

Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
मऊ। चौकिए नहीं! जिस कूड़ा करकट और घर के कचरे को आप बेकार समझकर उसे डिस्पोज करने के लिए परेशान होते हैं वह आपका जनरेटर भी चला सकता है। जैविक ऊर्जा मिशन माडल प्लांट के तहत तो इससे जैविक खाद, रसोई गैस और गांव में बिजली तक का संकट दूर हो सकता है। वैज्ञानिकों द्वारा इस तकनीक को गांवों में पहुंचाने के लिए नियोजन विभाग और कृषि आयुक्त ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रयोग कराने के बाद किसानों के हित में गांवों में प्लांट लगाने के लिए पत्र भेजा है।
बायो एनर्जी मिशन माडल खेत एवं खलिहानों तथा घरों में इकट्ठे होने वाले कचरे का एक आधुनिक रूप है। पूर्व में बायो गैस से निकलने वाली गैस को केवल भोजन बनाने के प्रयोग में ही लाया जाता था, लेकिन बायो इनर्जी मिशन माडल के तहत लगाए जाने वाले प्लांट में कई प्रकार की विशेषता है। कूड़े कचरे से निकलने वाली मिथेन गैस को इकट्ठा किया जा सकता है। यह गैस बिल्कुल प्राकृतिक गैस होती है। इसका उपयोग प्रकाश, ऊष्मा के लिए सीधे जलाकर किया जा सकता है। साथ ही इसे संचित कर या फिर कम्प्रेस करके ताप-इंजन को चलाने का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कूड़े कचरे से 65 से 68 प्रतिशत मीथेन गैस होती है और 33 प्रतिशत कार्बन डाई आक्साइड के साथ ही हाइड्रोजन सल्फाइड, नमी एवं कुछ अमोनिया का भी अंश होता है। प्लांट में कार्बन डाई आक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित करके दूर किया जाता है। इसी प्रकार हाइड्रोजन सल्फाइड लोहे के बुरादे से समाप्त कर दी जाती है। इसके लिए प्लांट में एक विशेष प्रकार का फिल्टर भी निर्मित किया जाता है। गैस को कंप्रेशर की मदद से कंप्रेश कर सीएनजी सिलेंडरों में भरा जा सकता है।
इस प्रकार इस गैस का उपयोग आवश्यकतानुसार खाना पकाने, प्रकाश करने, कृषि उपकरणों को संचालन करने एवं विद्युत उत्पादन हेतु जनरेटर में भी किया जा सकता है। यही नहीं मिथेन संयंत्र की सामुदायिक इकाई के जरीए छोटे शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में विद्युत कनेक्शन भी दिए जा सकते हैं। बायो इनर्जी मिशन माडल के अंतर्गत बचा हुआ कृषि, जैविक कचरा नाइट्रोजन और फास्फोरस युक्त जैविक खाद बनाने में काम आ सकेगा जिसे जैविक खाद के रूप में पैकेटों में भरकर बेचा भी जा सकता है। इस माडल को टीएससी कार्यक्रम के अंतर्गत यूनिसेफ के वित्तीय सहयोग के जरिये प्रदेश में प्रयोग के तौर पर लिया गया।
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