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गरीबों पर चाबुक और अमीरों को राहत

Mau

Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
मऊ। महंगाई हो या प्रशासन का अतिक्रमण अभियान इसकी पहली गाज गरीबों पर ही गिरती है। या यों कहें कि प्रशासनिक चश्मे से जो अतिक्रमण दिखता है उनका कोपभाजन पहले गरीब बनते हैं, जबकि रसूख वालों पर इसका असर नहीं दिखता है। यही नजर आ रहा है शहर में गत दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान की हकीकत तस्वीर को देखकर। शहर में रसूख रखने वाले एवं वाइनशापों एवं बियरशापों को छुआ तक नहीं गया, जबकि सड़क किनारे गरीबों का पेट भरने वाले बाटी चोखा और चाय पान वालों पर ऐसा अतिक्रमण का डंडा चला कि उन्हें अपने सामानों को सहेजने का भी मौका नहीं दिया गया।
शहर में गत दिनों प्रशासन ने नगरपालिका के सहयोग से अतिक्रमण को हटाने के लिए अभियान चलाया। अतिक्रमण हटाए जाने की कवायद शुरू होते ही ठेला, खाेंमचा, चाय, पान, बाटी, चोखा वाले दुकानदारों में तो जैसे भगदड़ मच गई। तपती धूप में वह अपनी चौकी, गुमटी लेकर ऐसे भागे जैसे कोई उन्हें खदेड़ रहा है। जो नहीं भाग पाए उन्हें तोड़फोड़ के रूप में नुकसान उठाना पड़ा। अपनी छोटी पूंजी को किसी तरह सहेजकर गुमटी और ठेला खोमचा को लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वालों को यह भी रियायत नहीं दी गई कि वह ऐसी जगहों पर अपनी दुकानों को पीछे कर लें जिससे जाम की समस्या उत्पन्न न हो और अतिक्रमण भी न दिखे। खैर अतिक्रमण हटाने में ऐसा संभव भी नहीं दिख रहा था कि गरीबों को कुछ राहत दी जा सके लेकिन बड़ी दुकानों पर अतिक्रमण का जोर क्यों नहीं चला इसे लेकर सवाल जरूर खड़े नजर आए। आजमगढ़ तिराहे को ही उदाहरण के रूप में सिर्फ लिजिए ठीक मंदिर के पीछे स्थित एक चर्चित मशीनरी की दुकान का न सिर्फ अपने दुकान के सामने अतिक्रमण है, बल्कि सड़क के ऊपर भी दर्जनों बड़ी बड़ी मशीनें ऐसी रखी है कि यदि कोई छोटा भी हादसा हो गया तो अतिक्रमण के चलते बड़ी घटना हो सकती है। अब बड़े दुकानों या काम्पलेक्स के सामने भी कमोवेश ऐसा ही हाल है। वह तो बकायदा अपने दुकान के सामने ऐसे अतिक्रमण किए हैं कि उस पर वह अपना ही हक समझते हैं। प्रशासन को अतिक्रमण के अभियान में वह भी नहीं दिखा। यही नहीं खुद सरकारी अंग्रेजी एवं बियर की दुकानें भी विधिवत गुमटी में दिखाई देती हैं, लेकिन वह भी बेरोकटोक प्रशासन के अभियान को ठेंगा दिखाती नजर आती हैं। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह का कहना है अतिक्रमण में कोई भेदभाव नहीं बरता जाएगा। ऐसी दुकानों को भी चिह्नित कर उन पर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
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