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एक ऐसा स्कूल जो शुक्रवार को रहता है बंद

Mau

Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
मधुबन (मऊ)। सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद सहित तमाम सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में साप्ताहिक अवकाश रविवार को घोषित किया गया है। वहीं फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र के ढिलईफिरोजपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय पर यह साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होता है। है ना ताज्जुब की बात! जी हां यह सच है। इस प्राथमिक विद्यालय में सारे मानक बेसिक शिक्षा परिषद के हैं, लेकिन साप्ताहिक अवकाश किसके आदेश पर बदला गया है यह जानकारी महकमे के किसी आला अधिकारी को नहीं है। गांव के लोग भी अन्य परिषदीय विद्यालयों की अपेक्षा इस स्कूल के अलग नियम, कानून को देख कुछ देर के लिए सोचते ही रह जाते हैं।
फतहपुर मंडाव ब्लाक में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से 136 प्राथमिक विद्यालय स्थापित हैं। महकमे की ओर सेे दशकों पूर्व ढिलईफिरोजपुर गांव स्थित लबे रोड पर प्राथमिक विद्यालय के नाम से स्कूल खोला गया। लेकिन अब इस स्कूल का नाम इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय कर दिया गया है। यही नहीं विद्यालय में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि आला अधिकारियों को जानकारी रहते हुए भी मामले को नजरंदाज किया जाता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस विद्यालय मेें अध्ययनरत छात्रों में ज्यादा गैर मुस्लिम छात्र हैं। यहां पुस्तकें, ड्रेस, छात्रवृत्ति, एमडीएम, अध्यापकों, शिक्षामित्रों की नियुक्ति आदि बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से ही की जाती है। लेकिन विद्यालय का नाम इस्लामियां विद्यालय करना और रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश घोषित करने के मामले में आला अधिकारी भी जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से चल रहे इस विद्यालय का नाम और अवकाश बदलने के संबंध में आला अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका यह भी कहना था कि विद्यालय में बच्चों को जात पात और धर्म का मतलब भी नहीं मालूम, लेकिन धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उधर ग्राम प्रधान साबिर का कहना है कि जब से विद्यालय बना है तब से वह इसी नाम से जाना जाता है। इसके चलते इस पर अभी तक कोई आपत्ति की बात नहीं आई और न ही इसे अल्पसंख्यक विभाग से जोड़े जाने की पहल हुई। उधर प्रधानाध्यापक कल्यान तिवारी का कहना है कि पूर्व में जिस नाम और जिस विभागीय व्यवस्था से यह विद्यालय संचालित था उसी तरह आज भी संचालित है। इस पर हमारे द्वारा
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