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ब्रज के राजा को भी सताने लगी ठंड

Mathura

Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
बलदेव। ब्रज के राजा श्रीदाऊजी महाराज को ठंड सताने लगी है। इससे बचाव के लिए शुक्रवार को अगहन पूर्णिमा पर महाराज रजाई ओढ़कर भक्तों को भी ठंड से बचाव का संदेश देंगे। इसी के साथ बलदेव में श्रीदाऊजी महाराज का प्राकट्योत्सव मेला भी शुरू हो जाएगा।
हाड़ कंपाने वाली ठंड का प्रकोप शुरू हो चुका है। इससे जनमानस ही नहीं आराध्य भी सिहर उठे हैं। इस गलन भरी ठंड से बचाव के लिए अगहन पूर्णिमा (आज) पर श्रीदाऊजी महाराज को रजाई धारण कर भाव सेवा की तपिश दी जाएगी। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को निभाने के लिए इस दिन लाखों भक्त श्रीदाऊजी महाराज की नगरी बलदेव पहुंचे हैं।
अगहन पूर्णिमा को क्षेत्रीय स्तर पर गद्दल पूनौं भी कहा जाता है। इस दिन ब्रज के राजा रजाई धारण कर सभी को सर्दी से बचाव के लिए तैयारी करने का संदेश देंगे। इस विशेष गद्दल दर्शनों के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है।

श्रीदाऊजी-माता का आज हुआ था प्राकट्य
मार्ग शीर्ष शुक्ल 15 संवत 1638 सन 1582 को बलदेव और माता रेवती जी के श्रीविग्रह का प्राकट्य हुआ था। कहते हैं श्रीमद्वल्लभाचार्य महाप्रभुजी पौत्र गोस्वामी गोकुलनाथजी ने विग्रह के प्राकट्य के बाद पर्ण कुटी में श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की थी। एक वर्ष बाद पुन:नवनिर्मित देवालय में संवत 1639 मार्ग शीर्ष पूर्णिमा सन 1583 को नए विशाल देवालय में प्राण प्रतिष्ठा की गई। पूजा का भार गोस्वामी श्रीकल्याण देव जी को सौंपा गया, जिनके वंशज आज भी इसी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।

नया देवालय से जुड़ा है मेला का आयोजन
नए विशाल देवालय का निर्माण दिल्ली निवासी श्यामलाल सेठ ने कराया और यहां युगल विग्रह की प्राण प्रतिष्ठित की गई। तभी से इस मेला का आयोजन स्मृति स्वरूप प्राकट्योत्सव मेला के रूप में किया जाता है।

कुषाणकालीन है श्रीविग्रह
मंदिर में स्थापित श्रीविग्रह कुषाणकालीन है, जिसे ब्रजमंडल के प्राचीन देवालयों में सबसे प्राचीनतम बताया गया है। यह विग्रह विशाल सिंहासन पर स्थापित करीब आठ फुट ऊंचा व साढे़ तीन फीट चौड़ा श्याम वर्ण है।
जलेबी न खाई तो मेला अधूरा
मेला में महिलाआें के सौंदर्य प्रसाधन, बच्चों के लिए खेल-खिलौनों आदि की दुकान सज चुकी हैं। क्षेत्रीय लोगों में मेला का आकर्षण जलेबी भी हैं। इसके बारे में मान्यता है कि मेला देखा और जलेबी न खाई तो मेला अधूरा माना जाता है।
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