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बरसाना में ‘गोकुल’

Mathura

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
अजय खंडेलवाल/मथुर।
यह राधाजी का बरसाना है। यहां असीम आस्था के बीच राधे-राधे की गूंज हर पल रहती है। यहां के अटूट श्रद्धाभाव में मानमंदिर सेवा संस्थान ने अद्भुत पुण्य का काज किया है। एक साथ 20 हजार गायें यहां विचरण करती हैं और देखने वाले इस दृश्य को अपलक निहारते रहते हैं। बरसाने की पहाड़ियों से जो मनोहारी दृश्य यहां उत्पन्न होता है उससे लगता है कि प्रभु श्रीकृष्ण के समय का गोकुल यहीं बस गया है।
भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय गायों को लेकर ब्रजवासियों में चेतना जाग रही है। मानमंदिर सेवा संस्थान द्वारा संचालित श्रीमाता जी गोशाला में लगभग 20 हजार गायों का लालन-पालन किया जा रहा है। इतना ही नहीं यहां बीमार गायों के उपचार के लिए आधुनिक अस्पताल भी बनवाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण को गायों से बेहद प्रेम था। पुराणों में बाबा के यहां सवा लाख गायों का उल्लेख है। श्रीकृष्ण ग्वाल वालों के साथ गायों को चराने जाते थे और फिर उन्हें अपनी बांसुरी की धुन से नियंत्रित करते थे।
श्रीमाताजी गोशाला मानमंदिर के सुनील सिंह ने बताया उनके यहां लगभग 20 हजार गायें हैं। अधिकांश गाय सड़कों पर घूमने वाली हैं। बीमार गायों के उपचार के लिए यहां 1.33 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें आरबीआई बरेली के विज्ञानियों की देखरेख में 60 से 70 लाख की उपचार मशीनें लगवाई जा रही हैं।

एक गाय पर खर्च हो रहे 32 रुपये
मथुरा। मानमंदिर सेवा संस्थान द्वारा संचालित श्रीमाताजी गोशाला में एक गाय के भोजन और रखरखाव पर प्रतिदिन 32 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस हिसाब से प्रतिदन का खर्चा लगभग 6.40 लाख बैठता है। ये खर्चा प्रति वर्ष 23 करोड़ 36 लाख बैठता है।

गोशाला को आत्म निर्भर बनाने की कवायद
मान मंदिर सेवा संस्थान बरसाना के संरक्षक तथा ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा का संकल्प गोशाला में एक लाख गायों को एकत्रित करने का है। ऐसे गोशाला का आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। एक आंकड़े के मुताबिक पांच हजार दुधारु गायों से 25 हजार दूध न देने वाली गायों का लालन-पालन किया जा सकता है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पांच सौ दुधारु गायों को भी गोशाला में रखा गया है। इनका दूध वृंदावन के इस्कॉन मंदिर तथा बरसाना के आश्रम में सप्लाई किया जा रहा है। अगर प्रयोग सफल रहा तो दुधारु गायों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

बांसुरी सुने बिना नहीं करतीं भोजन
श्रीमाताजी गोशाला में गायों के भोजन के समय साउंड सिस्टमों के माध्यम से बांसुरी की धुन भी सुनाई जाती है। इनमें से कई गायें तो ऐसी हैं जो बांसुरी सुने बिना भोजन ही नहीं करती हैं।

85 गोशाला में पल रहीं 35 हजार गायें
मथुरा। उप्र गोसेवा आयोग के पूर्व सदस्य राधाकृष्ण पाठक ने बताया जनपद में 85 गौशालाएं रजिस्टर्ड हैं। इनमें गायों की अनुमानित संख्या 35 हजार के करीब है। इनमें से अकेले 20 हजार गाय मान मंदिर सेवा संस्थान द्वारा संचालित श्री माता गौशाला में पल रही हैं। सूरश्याम गोशाला चंद्रसरोवर में 900 गायें हैं, वहीं वृंदावन पंचायती गौशाला में लगभग 1300 गायों का लालन-पालन किया जा रहा है। पाठक ने स्वीकारा कि कुछ गोशाला गायों को पालने के नाम पर व्यवसाय कर रहीं है।

कूड़े से भर रहा गोमाता का पेट
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी का स्याह पहलू ये भी है कि यहां बड़ी संख्या में गाय सड़कों पर घूमकर अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं। ये गाय कूड़ों के ढेर में भोजन की तलाश में रहती हैं और अक्सर सब्जी के छिलकों आदि के साथ पॉलीथिन व अन्य हानिकारक पदार्थ खा जाती हैं। गौशाला संचालक राधाकृष्ण पाठक का कहना कि कुछ विशुद्ध व्यवसायी लोग गायों से दूध निकाल कर उन्हें खुला छोड़ देते हैं।

मृत गायों के अंतिम संस्कार का संकल्प
मथुरा। श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा भी गौशाला का संचालन तथा अंतिम संस्कार क्रिया प्रकल्प का संचालन किया जा रहा है। इसमें सड़कों पर मृत गायों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

चोरों के निशाने पर रहतीं हैं गायें
मथुरा। ब्रज में गाय चोरों के कई गैंग सक्रिय हैं लेकिन पुलिस ने न तो मामला दर्ज करने की जेहमत उठायीं और न ही चोरों को पकड़ने के ही प्रयास किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008 में जनपद में गोधन संख्या 1,41,326 थी जो लगातार घट रही है।

‘ब्रज की पहचान श्रीकृष्ण, राधा और गाय से है। ब्रजवासियों को गाय को पालने, उनकी सेवा करने का संकल्प लेना चाहिए। इतना ही नहीं गाय को कष्ट में देखने मात्र से भी पाप लगता है ऐसे में उसकी हर संभव मदद करनी चाहिए। इससे जीवन की हर समस्या का समाधान हो जाता है।’
- ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा, संरक्षक, मान मंदिर सेवा संस्थान, बरसाना, मथुरा।
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