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साहब की सुस्ती से पब्लिक पस्त

Mathura

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
मथुरा। शासन स्तर पर भले ही सिटीजन चार्टर के खास माइनें हों, लेकिन प्रशासन के लिए इसके मायने कुछ अलग हैं। आलम यह है कि सिटीजन चार्टर लागू करने के उत्तरदाई प्रशासनिक अफसरों की नाक के नीचे ही तहसील दिवसों के फरियादी चप्पल घिसते रहते हैं और अफसर महज तमाशबीन बने हैं। हर बार फरियादी को मिलता है तो सिर्फ और सिर्फ आश्वासन।
सिटीजन चार्टर अब मखौल बन कर रह गया है। सरकारी अफसरों की सुस्ती इस व्यवस्था को निरंतर पलीता लगा रही है। विशेषकर सरकार की प्रायोरिटी वाले तहसील दिवसों में दर्ज शिकायतों के मामले में ऐसा ही हो रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन तहसील दिवसों की अध्यक्षता कमिश्नर, डीएम और एडीएम सरीखे उच्चाधिकारी करते हैं। वहां शिकायतकर्ता एक आध माह नहीं वर्षों चप्पलें घिसता है। बदले में उसे रटा रटाया जवाब मिलता है कि जल्द निस्तारण हो जाएगा या फिर संबंधित अफसर को उसके सामने प्रतिकूल प्रविष्टि की धमकी मिल जाती है। उसके बाद फिर वही अपनी ढपली अपना राग चलता है। वर्तमान में जनपद की चारों तहसीलों का रिकार्ड देखें तो यहां अब तक करीब 240 शिकायतें पेंडिंग हैं। इनमें से करीब तीन दर्जन शिकायतें ऐसी हैं जो वर्षों से लंबित हैं, लेकिन निस्तारण तो दूर पीड़ित की सुनवाई तक नहीं हो रही है।

केस-1
गांव दसविसा गोवर्धन निवासी तुलाराम ने गांव में बना अपना मकान बेच दिया था। इसमें लगे विद्युत कनेक्शन का बकाया भुगतान उसने 19 मार्च 2010 में कर दिया। इसके बाद कनेक्शन कटवाने के लिए एप्लीकेशन लगाई। लेकिन जब सालभर में भी विभाग ने पीडीसी नहीं की तो उसने 18 दिसंबर 2011 में तहसील दिवस में अधिकारियों को ऊर्जा मंत्री को संबोधित प्रार्थना पत्र सौंपकर कनेक्शन कटवाने की प्रार्थना की। लेकिन तब से लेकर आज तक हर तहसील दिवस में पहुंचने पर भी उसका कनेक्शन नहीं कटा है।
केस-2
ग्राम सभा धाना जीवना फरह के ग्रामीण कई तहसील दिवसों से गांव प्रधान द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। इस बार के तहसील दिवस में भी उन लोगों ने ग्राम प्रधान के कारनामों का ब्योरा अफसरों को देते हुए ग्राव प्रधान द्वारा किए गए धन के दुरुपयोग तथा विकास कार्यों की जांच की मांग की। लेकिन उन्हें सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला है।
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