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सच की कसौटी पर 10 हजार मुकदमे फेल

Mathura

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
मथुरा। इसे हकीकत मानें या पुलिस की मनमानी। दर-दर भटकने के बाद थानों में दर्ज मुकदमों में से औसतन 30 फीसदी पुलिस की विवेचना में झूठे निकलते हैं। पांच वर्ष के आंकड़ों से जाहिर है कि सच की कसौटी पर 10 हजार से अधिक मामले फेल हो गए।
जनपद के 20 थानों (थाना शेरगढ़ के आंकड़े उपलब्ध नहीं) में वर्ष 2007 से जुलाई 2012 तक 33623 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 10903 मुकदमे पुलिस की विवेचना में झूठे पाए गए। ये आंकड़ा दर्ज मुकदमों का 30 फीसदी बैठता है। ऐसे मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) न्यायालय में पेश की है।
आंकड़ों सबसे बड़ी संख्या थाना यमुना पार की है यहां 2165 मुकदमों में से 1073 मामलों में पुलिस ने एफआर लगा दी है। जो करीब 50 फीसदी बैठती है। सबसे कम संख्या थाना मर्गोरा की है। यहां दर्ज 479 मुकदमों के सापेक्ष 90 केसों में पुलिस ने एफआर लगाई है। जो करीब 20 फीसदी बैठता है।
इसकेे अलावा शहर कोतवाली में 6547 दर्ज मुकदमों में से 2211 में, थाना बरसाना में 562 मामलों के सापेक्ष 145 में, महिला थाने में 286 के सापेक्ष 73 में, कोसी 1585 के मुकाबले 546, वृंदावन में 3567 में से 870, मांट में 842 में 330, नौहझील में 743 में 188, सुरीर में 737 में 210, छाता में 1793 मेें 450, सदर में 1909 के सापेक्ष 685, यमुना पार में 2165 में 1073, बलदेव में 1523 के सापेक्ष 513, गोवर्धन में 2738 केसों में से 889 में, महावन में 639 में से 194, रिफाइनरी में 1715 में से 551 में, राया में 1249 में से 360 में, फरह में 2011 में 634, थाना हाइवे में 360 में से 150, थाना गोविंद नगर में 2173 दर्ज मुकदमों में 741 मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है।
ये दिलचस्प आंकड़ा पुलिस विभाग ने ही जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गयी सूचनाओं में दिया है। आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था ‘परिवर्तन’ से जुडे़ गौरव अग्रवाल द्वारा आरटीआई में मांगी सूचनाओं में यह खुलासा हुआ।

‘मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की फाइनल रिपोर्ट अंतिम सत्य नहीं होती है। कई मामलों में न्यायालय पुन: विवेचना या फिर वादी की पीड़ा सुनने का सख्त निर्णय लेती है।’
- रनवीर सिंह चौधरी
जिला शासकीय अधिवक्ता, ‘क्राइम’ मथुरा
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