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शिक्षा के मंदिर में अमावस सा अंधियारा

Mathura

Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
मथुरा। कान्हा की नगरी के गुरुकुल में अब अमावस सा अंधियारा है। सर्व शिक्षा अभियान की जमीनी हकीकत का एक ऐसा सच जो इस योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। एक ही कक्षा में पांच कक्षाओं के बच्चे संग संग तालीम की रोशनी हासिल कर रहे हैं तो दूसरी ओर नगर के ही एक भवन में चार स्कूलों का संचालन हो रहा है। कमरों में पंखे लगे है लेकिन बिजली नहीं है। स्कूल न बच्चे है और न अध्यापक। यह हाल तो तब है सर्व शिक्षा अभियान के तहत पिछले एक दशक से हर साल करोड़ों रुपये प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए खर्च किए जा रहे है। शिक्षा विभाग के शीर्ष स्तर के अधिकारी भी मथुरा के प्रति सौंतेला रुख अख्तियार किए हैं। अतर्जनपदीय स्थांतरण के तहत 277 शिक्षिकाआें का पदस्थापन अभी तक यहां नहीं किया गया है। इससे नवीन सत्र के ढाई माह गुजर जाने के बाद भी विद्यालयाें में छात्राें की पढ़ाई ने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है।
कमरा एक, कक्षाएं अनेक
सामने कूड़ा घर। भीतर दो दूनी चार के स्वर। कुछ बच्चे ड्रेस में तो कुछ बिना ड्रेस में रहकर बदलते भारत की असल तस्वीर बयां कर रहे हैं। बिजली-पानी कुछ भी नहीं है। इस विद्यालय में क क्षा एक से पांच तक के 90 बच्चे पढ़ते अपनी जिंदगी संवारने आते हैं। विद्यालय में एक अध्यापक और दो आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की डयूटी अक्सर पल्स पोलियो या अन्य विभागीय कार्यों में लगी रहती है।अध्यापक हैं नहीं इसलिए सभी पांचाें कक्षाएं एक ही कमरे में चल रही हैं।
इस इमारत में चलते हैं चार स्कूल
जनरल गंज स्थित कमला नेहरू स्कूल की बिल्डिंग सदा सुर्खियों में रहती है। इसी इमारत में एक नहीं बल्कि पांच स्कूल चल रहे हैं। दशावतार प्राथमिक विद्यालय प्रधानाध्यापिक ाइन्द्रेश शर्मा, सहअध्यापिका मधु सक्सेना और रश्मि शर्मा शिक्षामित्र कार्यरत हैं। स्कूल में 1से 5 तक कक्षाएं चलती हैं और सिर्फ 47 बच्चे अध्यनरत हैं। प्रधानाध्यापिक ाने बताया कि स्कूल सात बजे से खुलता है लेकिन बच्चे आठ बजे आते हैं। माता पिता बच्चाें से काम कराते हैं जिससे बच्चे समय से विद्यालय नहीं पहुंच पाते।
क्या करें डयूटी लग जाती है....
उसी भवन में लोकमान्य तिलक प्राथमिक विद्यालय है। प्रधानाध्यापिका मंजू सक्सेना, सहायक अध्यापिक ा फूलारानी और शिक्षामित्र किरन सारस्वत पढ़ाती हैं। यह विद्यालय भी पाचवीं तक है और यहां 40 बच्चें यहां पढ़ते हैं। साल में बाल गणना, बीएलओ और जनगणना आदि कार्य कराए जाते हैं जिससे की पढ़ाई में व्यवधान आता है।
यूनिफार्म बंदर ले भागे...
तीसरी के छात्र नरेश बिना ड्रेस के लोकमान्य तिलक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने आया है। पूछने पर बताया कि यूनिफार्म बंदर लेकर भाग गए हैं। तब से बिना यूनिफार्म के आते हैं। घर पर पानी भरना पड़ता है इसलिए देरी हो जाती है।
पांचवी की छात्रा मनीषा बताती है कि मम्मी ढकेल लगाती हैं, इसलिए सुबह उनके साथ हाथ बंटाने में देर हो जाती है।
पंखे हैं पर बिजली नहीं, नल है पर पानी नहीं
एक ही भवन में चलने वाला तीसरा विद्यालय रंगेश्वर कन्या प्राथमिक विद्यालय है। इसमें तीन शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। इनमें हीरावती प्रधानाध्यापिक , रेनू वर्मा सहायक अध्यापिक ा और सूची अरोडा शिक्षामित्र हैं। इस स्कूल में एक से पांचवी तक के 44 छात्र-छात्राएं हैं। प्रधानाध्यापिक ने बताया कि स्कूल में बिजली पानी की समस्याएं है। कमरो में अंधेरा रहता है, भारतीय स्टेट बैंक ने पंखे स्कूल में लगवाए है लेकिन बिजली न होने के कारण वह शो पीस बने हुए है।
बच्चाें को बुलाकर लाते हैं घर से
कमला नेहरू कन्या पाठशाला की प्रधानाध्यापिका मधु सक्सेना, सहायक अध्यापिका सुषमा पाठक और शिक्षामित्र पूजा अग्रवाल कहती हैं कि जब से मांटेसरी स्कूल खुलने लगे हैं तब से अभिभावक प्राथमिक विद्यालयाें में अपने बच्चाें को पढ़ाना नहीं चाहते। हम लोग घराें से बच्चाें को बुला बुलाकर लाते हैं।
मिड-डे मिल खाकर चले जाते हैं बच्चे
इस सब विद्यालयाें केअलावाें यहां एक आगंनबाड़ी विद्यालय भी चलता है। इसमें बच्चे और अध्यापिका 9 बजे आते हैं। लेकिन बच्चे पंजीरी और मिड डे मील खाकर चले जाते हैं।
शहरी क्षेत्राें में शिक्षिकाें की नियुक्तियाें पर रोक लगी है और जो बीटीसी और वरिष्ठ बीटीसी की टीचर हैं उनको ग्रामीण अंचलाें में पढ़ाने केलिए भेज दिया जाता है। इस वजह से कुछ दिक्कत है। रही बात सफाई कर्मचारियाें की तो इसका संबंध नगर पालिका से है। इसकेलिए नगर पालिका जिम्मेदार है। बिजली और पानी के लिए पता कराएंगे।
---- श्यामप्रकाश यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा।
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