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पांच हजार वर्ष पहले जन्मे थे कान्हा

Mathura

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की गणना तीन हजार वर्ष पूर्व की जाती है। माना जाता है कि कान्हा द्वापर युग के अंत और कलियुग के आरंभ काल तक धरती पर विद्यमान रहे। जन्म के मामले में यूं तो तमाम विद्वानों के अपने अपने तर्क हैं। इन्हें संबल दिया है गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्धार के कलेंडर ने।
कलियुग का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 3179 शक संवत चैत्र शुक्ल एक के पूर्व हुआ। वर्तमान में शक संवत 1932 चल रहा है। दोनों को जोड़े तो योग 5111 बैठता है। इस प्रकार कलियुग के आरंभ होने से छह माह पूर्व मार्ग शीर्ष शुक्ल 14 को महाभारत युद्ध आरंभ हुआ। जो 18 दिन तक चला। उस समय भगवान श्रीकृष्ण की आयु 83 वर्ष थी। उन्होंने 119 वर्ष की उम्र में भूलोक त्यागा। इस प्रकार भारतीय मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का काल शक संवत पूर्व 3263 की भाद्रपद कृष्णा अष्टमी बुधवार से शक संवत पूर्व 3144 तक है।
विख्यात ज्योतिषी वाहर मिहिर, आर्यभट्ट व ब्रहमगुप्त के समय से यह मान्यता प्रचलित है। देश की सबसे प्राचीन युधिष्ठिर संवत, जिसकी गणना कलियुग से 40 वर्ष पूर्व से की जाती है, इस मान्यता को पुष्ट करता है। भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण का अवतार 125 वर्ष के लिए हुआ था। कलियुग की मूल आयु 5108 में श्रीकृष्ण की आयु जोड़ने पर यह 5233 वर्ष बैठती है। एक अन्य मत के अनुसार यवन नरेश सेल्युकस के राजदूत मेघस्थनीज के भारतीय नरेश चंद्रगुप्त के यहां आने का विवरण मिलता है।
मेघस्थनीज ने लिखा है कि मथुरा में शौरसेनी लोगों का निवास है। वे प्रमुख रूप से हरकुलीज (हरिकृष्णा) की उपासना करते हैं। डायोनिसियस से हरकुलीज 15 पीढ़ी और सेंड्रकोटम (चंद्रगुप्त) 153 पीढ़ी पहले हुए थे। इस प्रकार श्रीकृष्ण और चंद्रगुप्त में 138 पीढ़ियों का अंतर हुआ। यदि प्रत्येक पीढ़ी 20 वर्ष की मानी जाय तो 38 पीढ़ियों के 2760 वर्ष हुए। चंद्रगुप्त का समय ईसा से 326 वर्ष पूर्व है। इस हिसाब से श्रीकृष्ण का काल अब से 5051 वर्ष पूर्व सिद्ध होता है।

नक्षत्र गणना से पांच हजार वर्ष पूर्व हुआ जन्म
मथुरा (ब्यूरो)। नक्षत्र गणना के हिसाब से भी श्रीकृषण जन्मकाल का निर्णय किया गया है। परीक्षित के समय में सप्तऋषि मघा नक्षत्र पर थे। ज्योतिष के अनुसार सप्तऋषि एक नक्षत्र पर एक सौ वर्ष तक रहते हैं। आजकल सप्तऋषि कृतिका नक्षत्र पर हैं। जो मघा से 21वां नक्षत्र है। इस प्रकार मघा से कृतिका पर आने में 2100 वर्ष लगे हैं। इससे यह मानना होगा कि मघा से अब तक 27 नक्षत्रों का चक्र पूरा हो चुका है। दूसरे चक्र में सप्तऋषि मघा पर आए थे। पहले चक्र के 2700 वर्ष जोड़ने पर कुल 4800 वर्ष हुए। इस समय परीक्षित मौजूद थे। परीक्षित के पितामह अर्जुन थे। जो श्रीकृष्ण से 18 वर्ष छोटे थे। इस प्रकार ज्योतिष गणना के हिसाब से श्रीकृष्ण का काल करीब पांच हजार वर्ष पूर्व सिद्ध होता है।
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