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इंटर कालेजों में ठप पड़ी गतिविधियां

Mainpuri

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। खेल प्रतिभाओं को निखारने के नाम पर इंटर कॉलेजों में खेल चल रहा है। विद्यार्थियों से क्रीड़ा शुल्क तो वसूला जा रहा है, लेकिन संसाधन न के बराबर हैं। सुविधाएं हैं नहीं। हां, इतना जरूर है कि जब भी जनपदीय युवक समारोह होना होता है, उससे कुछ दिन पूर्व ही विद्यालयों में खेल शुरू हो जाते हैं। इसके बाद फिर वीरानी छा जाती है।
गौरतलब है कि इंटर कालेजों में क्रीड़ा शुल्क और स्काउट शुल्क के नाम पर एक-एक रुपये प्रतिमाह वसूल किया जाता है। क्रीड़ा शुल्क से जमा धन का उपयोग खेल और खिलाड़ियों पर होना चाहिए, लेकिन धरातल में ऐसा होता नजर नहीं आता। सिर्फ कागजों पर खेल एक्सप्रेस दौड़ रही है। डेढ़ सैकड़ा से अधिक इंटर कालेजों में शायद ही कोई ऐसा कालेज का मैदान नजर हो, जिसमें खेल होते हों। कसबा और ग्रामीण अंचल की बात तो दूर, नगर के प्रमुख कालेजों के खेल मैदान भी सूने नजर आ रहे हैं। क्रिश्चियन कालेज और राजकीय इंटर कालेज का विशाल मैदान हो अथवा अन्य कालेजों के मैदान, ये सभी गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। मैदानों में खिलाड़ी नहीं, आवारा जानवर अथवा वाहन सीखने वाले लोग ही नजर आते हैं।
इस पर भी प्रधानाचार्यों का तर्क होता है कि छात्र खेल में अब रुचि ही नहीं लेते, जबकि छात्रों का कहना है कि उन्हें खेल उपकरण ही नहीं दिए जाते हैं। राजकीय इंटर कालेज के छात्र आदेश का कहना था कि क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है, लेकिन कभी खेल सामग्री नहीं आती। अपने स्तर से ही खेल उपकरणों का इंतजाम करना पड़ता है। क्रिश्चियन इंटर कालेज के छात्र पंकज, गौतम बुद्ध इंटर कालेज के छात्र सुनील, डीएवी इंटर कालेज के छात्र अनुपम ने बताया कि उन्हें दो वर्ष हो गए, लेकिन अब तक विद्यालय से कोई संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए।
अब सवाल यह है कि आखिर क्रीड़ा शुल्क का पैसा जाता कहां है, इसका जवाब कोई देना नहीं चाहता। सभी का बस यही कहना है कि जनपदीय युवक समारोह के लिए पैसा देना होता है और छोटे खेल आयोजनों पर क्रीड़ा शुल्क खर्च हो जाता है। खेल और खिलाड़ियों के लिए जमा होने वाला क्रीड़ा शुल्क नाकाफी है। डीआईओएस गजराज प्रसाद यादव का कहना है कि कालेजों में खेलकूद उपकरण क्रय कर छात्रों को प्रतिदिन खेल खिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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