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हड़ताल से समितियों में 10 दिन से पड़ा ताला

Mainpuri

Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। जनपद में सहकारिता विभाग से कर्मचारी और किसान, दोनों ही परेशान हैं। न कर्र्मचारियों की सुनी जा रही है और न किसान की। जिले में किसानों को खाद, बीज, दवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए 57 सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों से लगभग 50 हजार किसानों को लाभान्वित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि खुद सहकारिता विभाग के कर्मचारी अपना हित लाभ लेने के लिए पिछले 10 दिनों से सभी सहकारी समितियों में ताले डालकर आंदोलन कर रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं।
जिले में किसानों की स्थिति सुधारने के लिए 57 साधन सहकारी समितियां स्थापित हैं। इन समितियों पर 270 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इन समितियों से जनपद के 50 हजार किसानों को खाद, बीज, दवाएं, कृषि ऋण आदि उपलब्ध कराया जाता है। समितियों पर हड़ताल के चलते हुई ताला बंदी के कारण किसान उर्वरकों और बीजों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। एक दर्जन से अधिक सहकारी समितियों के भवन खस्ताहाल हैं। इन भवनों की मरम्मत की ओर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। कुछ स्थानों पर तो किराए के भवनों में समितियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे किसानों को लाभान्वित किया जा सके, पर समितियों पर लटके तालों से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा।

क्या है ऋण का प्रावधान
समितियों पर किसानों को प्रति हेक्टेयर जमीन पर 17 हजार रुपये का ऋण दिया जाता है। इस ऋण पर किसानों को चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होता है। इतना ही नहीं यदि किसान निर्धारित समय अवधि में धनराशि जमा कर देता है, तो उसे एक प्रतिशत ब्याज की धनराशि में छूट दी जाती है।

सात करोड़ से अधिक बकाया
जिले की सभी साधन सहकारी समितियां जिला सहकारी बैंक से पैसा लेकर किसानों को लोन देती हैं। समितियों द्वारा किसानों से जून माह में वसूली की गई। वसूली के बाद भी जनपद के किसानों पर सभी 57 समितियों का सात करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।

अधिकारी कर रहे अनदेखी
सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह राठौर का कहना है कि समितियों में कार्यरत कर्मियों को नियमित वेतन भुगतान ही नहीं किया जाता। नियमित वेतन भुगतान की मांग के लिए निबंधक सहकारिता के प्रस्ताव को लागू कराने के लिए पिछले 10 दिनों से हड़ताल की जा रही है। अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।
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