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68 माह, 69 लापता

Mainpuri

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
मैनपुरी। अपनों की डांट से क्षुब्ध होकर बच्चों के लापता होने का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। जिले से हर महीने दो नाबालिग बच्चे घर की दहलीज पार कर रहे हैं। अपने लाल के न मिलने से परिजन हताश हो जाते हैं। पुलिस भी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है।
दरअसल, जिले में बीते 68 माह में 69 बच्चे लापता हुए हैं। इनका अब तक कोई पता नहीं चला है। परिजन परेशान हैं। हर पल परिजनों की निगाहें दरवाजों पर लगी रहती हैं। बच्चों के साथ किसी अनहोनी होने का भय उन्हें परेशान किए रहता है। कई बार पुलिस के यहां दस्तक दी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। हां, इतना जरूर है कि परिजनों के प्रयास से लापता हुए 135 में से 66 बच्चे अपने घर लौट चुके हैं।
दरअसल, गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस उनके फोटो तथा विवरण डीसीआरबी में अंकित करती है, जो बाद में एससीआरबी को भेजी जाती है। यह सूचना एससीआरबी से प्रदेश के सभी जिलों में भेज दी जाती है। डीसीआरबी शाखा बच्चों का विवरण दर्ज कर इश्तहार थानों, तहसीलों, कचहरी, दीवानी, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के साथ ही प्रमुख स्थानों पर चस्पा कराती है। जिले में गठित की गई चाइल्ड हेल्प सेल अभी भी कार्यरत है। पुलिस कार्यालय में कार्यरत सेल में दो पुलिस कर्मी लापता बच्चों का ही पूरा रिकार्ड रखते हैं।
बच्चे ही नहीं, बालिग भी अपने घरों से लापता हो रहे हैं। एक छात्रा तथा एक वृद्ध का अभी तक पता नहीं चल सका है। तलाश के बाद पता न चलने पर परेशान होकर परिजन अब घर बैठ गए हैं।
वहीं थाना बेवर के कौवाटांडा निवासी अंजू पुत्री देवेश सिंह 18 जुलाई को घर से कंप्यूटर सीखने फर्रुखाबाद गई थी। जब वह लौट कर नहीं आई तो उसकी मां ने फोन किया। फोन पर उसने बताया कि वह नहर पुल पर है। पेट दर्द की दवा लेकर आएगी। इसके बाद से वह घर नहीं पहुंची। परिजनों ने तलाश के बाद पता न चलने पर थाने में तहरीर दी। इसके बाद भी छात्रा का कोई पता नहीं है। परिजन परेशान हैं कि आखिर वह गई कहां है।
वहीं बेवर के फर्रुखाबाद रोड निवासी पूर्व सभासद वृद्ध पूरन लाल मिश्रा एक अप्रैल को अचानक गायब हो गए। वह घर से बाजार के लिए निकले थे। रोडवेज बस स्टैंड पर उनको देखा गया था। परिजनों ने तलाश की। जानकारी न चलने पर थाने में तहरीर दे दी। बाद में उनका मोबाइल घिरोर क्षेत्र में पड़ा मिला था। कॉल डिटेल निकलवाने के बाद भी कुछ पता नहीं चला। परिजन परेशान हैं कि आखिर वह गए कहां हैं। बाद में उनके पुत्र ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दी है।
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